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Indian long pepper

पिप्पली (Indian long pepper)

वैदेही,कृष्णा,मागधी,चपला आदि पवित्र नामों से अलंकृत,सुगन्धित पिप्पली भारतवर्ष के उष्ण प्रदेशों में उत्पन्न होती है। वैसे इसकी चार प्रजातियों का वर्णन आता है परन्तु व्यवहार में छोटी और बड़ी दो प्रकार की पिप्पली ही आती है। बड़ी पिप्पली मलेशिया,इंडोनेशिया और सिंगापुर से आयात की जाती है,परन्तु छोटी पिप्पली भारतवर्ष में प्रचुर मात्रा में उत्पन्न होती है। इसका वर्ष ऋतू में पुष्पागम होता है तथा शरद ऋतू में इसकी बेल फलों से लद जाती है। बाजारों में इसकी जड़ पीपला मूल के नाम से मिलती है। यह सुगन्धित,आरोही अथवा भूमि पर फैलने वाली,काष्ठीय मूलयुक्त,बहुवर्षायु,आरोही लता है। इसके फल 2-3 सेमी लम्बे, 2 मिमी चौड़े,कच्चे शहतूत जैसे,किन्तु छोटे व बारीक,पकने पर लाल रंग के व सूखने पर धूसर कृष्ण वर्ण के होते हैं | इसके फलों को ही पिप्पली कहते हैं।
पिप्पली के विभिन्न औषधीय गुण –
1- पिप्पली को पानी में पीसकर माथे पर लेप करने से सिर दर्द ठीक होता है।
2- पिप्पली और वच चूर्ण को बराबर मात्रा में लेकर ३ ग्राम की मात्रा में नियमित रूप से दो बार दूध या गर्म पानी के साथ सेवन करने से आधासीसी का दर्द ठीक होता है।
3- पिप्पली के 1-2 ग्राम चूर्ण में सेंधानमक,हल्दी और सरसों का तेल मिलाकर दांत पर लगाने से दांत का दर्द ठीक होता है।
4- पिप्पली,पीपल मूल,काली मिर्च और सौंठ के समभाग चूर्ण को 2 ग्राम की मात्रा में लेकर शहद के साथ चाटने से जुकाम में लाभ होता है।
6- पिप्पली चूर्ण में शहद मिलाकर प्रातः सेवन करने से,कोलेस्ट्रोल की मात्रा नियमित होती है तथा हृदय रोगों में लाभ होता है।
6-पिप्पली और छोटी हरड़ को बराबर-बररबर मिलाकर,पीसकर एक चम्मच की मात्रा में सुबह- शाम गुनगुने पानी से सेवन करने पर पेट दर्द,मरोड़,व दुर्गन्धयुक्त अतिसार ठीक होता है।
7- आधा चम्मच पिप्पली चूर्ण में बराबर मात्रा में भुना जीरा तथा थोड़ा सा सेंधा नमक मिलाकर छाछ के साथ प्रातः खाली पेट सेवन करने से बवासीर में लाभ होता है।

Benefits Of Indan Sweet Fennel

सौंफ

पतंजलि के अनुसार, सौंफ वात तथा पित्त को शांत करता है, भूख बढ़ाता है, भोजन को पचाता है, वीर्य की वृद्धि करता है। हृदय, मस्तिष्क,आखों एवं शरीर के लिए लाभकारी है। यह बुखार, गठिया आदि वात रोग, घावों, दर्द, आँखों के रोग, योनि में दर्द, अपच, कब्ज की समस्या में फायदा पहुंचाता है। इसके साथ ही यह पेट में कीड़े, प्यास, उल्टी, पेचिश, बवासीर, टीबी आदि रोगों को ठीक करने में भी सहायता करता है। इसके अलावा सौंफ का प्रयोग कई अन्य रोगों में भी किया जाता है एवं रसोई में सौंफ का उपयोग मसाले के रूप में भी किया जाता है।

सौंफ में विटामिन सी की जबर्दस्त मात्रा है और इसमें आवश्यक खनिज भी हैं जैसे कैल्शियम, सोडियम, फॉस्फोरस, आयरन और पोटेशियम।

सौंफ के घरेलू नुख्से

  1. पेट की बीमारियों के लिए यह बहुत प्रभावी दवा है जैसे मरोड़, दर्द और गैस्ट्रिक डिस्ऑर्डर के लिए।
  2. माउथ फ्रेशनर के रूप में भी आप सौंफ का उपयोग कर सकते हैं। यह सांसों की दुर्गंध से छुटकारा दिला सकती है।
  3. सौंफ का नियमित सेवन दृष्टि को तेज करता है। 5-6 ग्राम सौंफ रोज लेने से लीवर और आंखों की ज्योति ठीक रहती है।
  4. अगर भूनी हुई सौंफ को मिश्री के साथ खाया जाए, तो खांसी से राहत और आवाज की मधुरता बढ़ाई जा सकती है।
  5. अगर आप चाहते हैं कि आपका कोलेस्ट्रॉल स्तर न बढ़े तो खाने के लगभग 30 मिनट बाद एक चम्मच सौंफ खा लें। सौंफ कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रण में रखती है।
  6. सूखी, रोस्टेड और कच्ची सौंफ को बराबर मात्रा में मिला लें। इसे खाने के बाद खाएं। इससे पाचन क्रिया बेहतर रहेगी और आप हल्का महसूस करेंगे।
  7. अगर आप एक चम्मच सौंफ 2 कप पानी में उबाल लें और इस मिश्रण को दिन में दो-तीन बार लें तो आपकी आंतें अच्छा महसूस करेंगी और खांसी भी लापता हो जाएगी।
  8. सौंफ की पत्तियों में खांसी संबंधी परेशानियां जैसे दमा व ब्रोन्काइटिस को दूर रखने की भी क्षमता होती है।
  9. 15-30 मिली सौंफ काढ़ा में मिश्री तथा गाय का दूध मिलाकर पिएं। इससे हकलाना की परेशानी कम होती है।
  10. सौंफ का काढ़ा बनाकर उसमें फिटकरी मिलाकर गरारा करने से मुँह के छालों में लाभ होता है। सौंफ में बराबर मिश्री मिलाकर सेवन करने से मुँह से बदबू आने की परेशानी ठीक होती है।
  11. अपच संबंधी विकारों में सौंफ बेहद उपयोगी है। बिना तेल के तवे पर सिंकी हुई सौंफ और बिना सिंकी सौंफ को मिलाकर लेने से अपच के मामले में बहुत लाभ होता है।
  12. दो कप पानी में उबली हुई एक चम्मच सौंफ को दो या तीन बार लेने से अपच और कफ की समस्या समाप्त होती है।

13.अंजीर के साथ सौंफ का सेवन करने से सूखी खाँसी, कफ, गले की सूजन तथा लंग कैंसर में लाभ होता है। 5 मिली सौंफ के पत्तों के स्वरस का सेवन करने से अस्थमा में लाभ होता है।

  1. सौंफ के बीज के 10-20 मिली काढ़ा में मधु मिलाएं। इसे नियमित सेवन करने से मासिक धर्म विकार जैसे- समय पर मासिक धर्म का ना आना, मासिक धर्म के समय दर्द होना और बांझपन आदि में लाभ होता है।
  2. यह शिशुओं के पेट और उनके पेट के अफारे को दूर करने में बहुत उपयोगी है।
  3. सौंफ का उपयोग चाय के रूप में भी किया जा सकता है। सौंफ की चाय पीने से मोटापे को कम किया जा सकता है।

17.आप खाने के बाद भी सौंफ का सेवन पाचन शक्ति को बढ़ाने के लिए कर सकते हैं। सिर्फ पाचन ही नहीं, बल्कि इससे खून भी साफ हो सकता है।

  1. सौंफ के पत्ते के रस में रूई को भिगोकर आँखों पर रखें। इससे आँखों की जलन, दर्द तथा लालिमा की परेशानी ठीक होती है।

1-2 ग्राम सौंफ चूर्ण में 65 मि.ग्रा. खसखस यानी पोस्त के दानों का चूर्ण मिला लें। इसे नियमित सेवन करने से आँखों के रोग ठीक होते हैं तथा आँखों की रोशनी बढ़ती है।

2-4 ग्राम सौंफ चूर्ण में बराबर भाग खाँड मिलाकर सेवन करें। इससे मानसिक रोग तथा गाय के दूध के साथ सेवन करने से आँख के रोग ठीक होते हैं।

19.सौंफ में मूत्रवर्धक गुण होते है। सौंफ की चाय पीने से आपको बार-बार मूत्र आएगा जो शरीर से टॉक्सिन को निकाल बाहर करेगा।

20.सौंफ की चाय
एक चम्मच सौंफ लें। इन्हें गर्म पानी में डालें। इस बात का ध्यान रखें कि आप इन्हें ज़्यादा न उबालें क्योकि ज्यादा उबालने से इनके पोषक तत्व खत्म हो सकते हैं। अब इसे तकरीबन दस मिनट तक ढ़क कर रख दें। अब यह पानी पीले रंग की चाय में बदल जाएगा। इसे दिन में दो से तीन बार पीएं।

21.सौंफ का पानी
एक या दो चम्मच सौंफ को एक गिलास पानी में रातभर के लिए भिगो दें। सुबह उठते ही सबसे पहले इसे पी लें।

सौंफ के सेवन की मात्रा

रस – 5 मिली

काढ़ा – 15-30 मिली

चूर्ण – 2 ग्राम

सावधनियाँ-

स्तनपान करा रही महिलाओं को सौंफ का अधिक उपयोग करने से परहेज करना चाहिए, क्योंकि इससे शिशु की सेहत पर असर पड़ सकता है।
अधिक सौंफ खाने से स्किन की संवेदनशीलता बढ़ सकती है और धूप में निकलना काफी मुश्किल हो सकता है।
अगर आप किसी प्रकार की दवाइयों का सेवन करते हैं, तो आपको सौंंफ का अधिक सेवन करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
सौंफ का अधिक सेवन एलर्जी का कारण बन सकता है।

Benefits Of Garlic

लहसुन

लहसुन कम से कम 150 तरह के रोगों या लक्षणों जैसे कैंसर से लेकर डायबिटीज और दिल के रोगों, रेडिएशन के साईड इफेक्ट्स आदि के नियंत्रण में उपयोगी है।

लहसुन किसी भी सब्‍जी के स्‍वाद को जानदार बना देता है।लेकिन लहसुन में ऐसे गुणकारी तत्‍व मौजूद होते हैं जो आपको कई बीमारियों से दूर रखते हैं। लहसुन में एलिकिन नामक औषधीय तत्व पाया जाता है। एलिकिन में जीवाणुरोधी, एंटीवायरल, एंटीफंगल और एंटीऑक्सिडेंट गुण होते हैं। लहसुन विभिन्न प्रकार के विटामिन और पोषक तत्वों से भी भरपूर होता है। इसमें विटामिन B1, B6 और C के साथ-साथ मैगनीज़ कैल्शिम, तांबा, सेलेनियम और अन्य जरूरी तत्व पाए जाते हैं।

लहसुन के फायदे

लहसुन का सेवन ब्लड प्रेशर को कंट्रोल रखने में मददगार हो सकता है। इसलिए अगर हाई ब्लड प्रेशर के मरीज इसका सेवन करते हैं, तो उन्हें ब्लड प्रेशर को मैनेज करने में काफी मदद मिल सकती है। हाई ब्लड प्रेशर आज के समय की एक बड़ी समस्या बन चुका है, जिसके कारण हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी बीमारियां हो जाती सकती हैं। ऐसे में रोजाना लहसुन का सेवन करने से कई तरह के फायदे हो सकते हैं।

लहसुन के रोजाना सेवन से आप खुद को स्वस्थ रख सकते हैं। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि दुनिया में सबसे ज्यादा लोगों की मौत का कारण हार्ट अटैक, स्ट्रोक, कैंसर, हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों से होती है। लेकिन लहसुन का सेवन करने से बीमार होने का खतरा कम हो जाता है।

लहसुन में सल्फर अच्छी मात्रा में पाया जाता है। सल्फर एक ऐसा कंपाउंड है, जो आपके अंगों को धातुओं के जहरीलेपन से बचाता है, जिससे अंग डैमेज नहीं होते हैं। गलत खानपान से शरीर में कई हानिकारक तत्व पैदा हो सकते हैं, इन्हें ही टॉक्सिन्स कहा जाता है। ऐसे में लहसुन का सेवन कर आप शरीर को डिटॉक्स कर सकते हैं।

बढ़ा हुआ खराब कोलेस्ट्रॉल आपकी धमनियों में जमा होकर धमनियों को ब्लॉक कर सकता है, जिससे दिल और दिमाग तक पर्याप्त मात्रा में ब्लड नहीं पहुंच पाता है। इसी कारण से कोलेस्ट्रॉल बढ़ने पर दिल की बीमारियां जैसे हार्ट अटैक, हार्ट फेल्योर के साथ-साथ स्ट्रोक का भी खतरा बढ़ सकता है। लेकिन लहसुन के सेवन से यह खतरा कम हो जाता है।

लहसुन के कुछ उपयोगी घरेलू नुस्खे

  1. एक कप तिल के तेल में 8 लहसुन की कलियां डालकर गर्म करें और ठंडा होने पर कमर से लेकर जांघों तक इससे मालिश करें। इससे साइटिका में काफी लाभ होता है।

2.लहसुन गैस और दिल के रोगों के लिए बहुत उपयोगी माना जाता है। सूखे लहसुन की 15 कलियां 1/2 लीटर दूध और 4 लीटर पानी को एक साथ उबाल लें। इस पानी को इतनी देर उबालें कि पानी आधा रह जाए। इस पाक को जब गैस और दिल के रोग से ग्रसित रोगियों को दिया जाता है तो आराम मिल जाता है।

  1. जिन लोगों को जोड़ों का दर्द या आमवात जैसी शिकायतें हो, लहसुन की कच्ची कलियां चबाना उनके लिए अत्यंत लाभदायक होता है। बच्चों को यदि पेट में कृमि (कीड़े) होने की शिकायत हो तो लहसुन की कच्ची कलियों का 20-30 बूंद रस एक गिलास दूध में मिलाकर देने से कृमि मर कर शौच के साथ बाहर निकल आते हैं।
  2. सरसों के तेल में लहसुन की कलियों को पीसकर उबाला जाए और घावों पर लेप किया जाए तो घाव तुरंत ठीक होना शुरू हो जाते हैं।
  3. हाई ब्लड प्रेशर की शिकायत हो उन्हें रोजाना सुबह लहसुन की कच्ची कली चबाना चाहिए, नमक और लहसुन का सीधा सेवन खून साफ करता है। और सिर्फ कच्ची लहसुन और शुद्ध दूध का सेवन कैंसर जैसे रोग को भी जड़ से खत्म करता है !
  4. ब्लड में प्लेटलेट्स की कमी होने पर भी नमक और लहसुन का समान मात्रा में सेवन करना चाहिए।
  5. लहसुन के एंटीबैक्टिरियल गुणों को आधुनिक विज्ञान भी मानता है, इसका सेवन बैक्टीरिया जनित रोगों, दस्त, घावों, सर्दी-खांसी और बुखार आदि में बहुत लाभ करता है।
  6. लहसुन की 2 कच्ची कलियां सुबह खाली पेट चबाएं। इसके आधे घंटे बाद आधा चम्मच मुलेठी पाउडर का सेवन करें। यह उपाय दो महीने तक लगातार करें। मान्यता है इससे दमा रोग जड़ से खत्म हो जाता है।
  7. लौकी 50 ग्राम और लहसुन की कलियां 10 ग्राम लेकर पीस लें और इसे आधे लीटर पानी में उबालें। जब आधा पानी रह जाए तो छानकर कुल्ला करें। इससे दांत दर्द दूर होता है।
  8. कान में कीड़ा चला जाने पर डांग- गुजरात के आदिवासी सूरजमुखी के तेल में लहसुन की दो कलियां डालकर गर्म करते है और फ़िर इस तेल की कुछ बूंदें कान में डालते है, इनका मानना है कि इससे कीट बाहर निकल आता है।

Benefits Of Elephant Creeper

विधारा (Elephant Creeper)

विधारा साधारण लता नही एक औषधीय लता है

विधारा को Elephant Creeper, अधोगुडा, घाव बेल, समुद्र सोख,आदि नाम से भी जाना जाता है। विधारा का एक अन्य प्रचलित नाम घावपत्ता भी है। यह पूरे भारत में बहुत आसानी से उपलब्ध है, इसको घरों में बड़े गमलों में लगाया जा सकता है यह वैसे भी निर्जन पड़े स्थानों में आसानी उग आता है । औषधीय प्रयोग के लिए उन्ही पौधों के पत्तो का इस्तेमाल करें जो पौधे धूप में लगे हैं।

विधारा स्वाद में कड़वा, तीखा, कसैला तथा गर्म प्रकृति की एक सदाबहार लता है। आयुर्वेद में इसका प्रयोग रसायन यानी सातों धातुओं को पुष्ट करने वाले पदार्थ के रूप में किया जाता है। इसका प्रयोग कफ, वात शान्त करता है,पुरुषों में शुक्राणुओं को बढ़ाता है, हड्डियां मजबूत होती हैं,विधारा का जोड़ों का दर्द, गठिया, बवासीर, सूजन, डायबिटीज, खाँसी, पेट के कीड़े, घाव भरने , ब्लीडिंग रोकने, एनीमिया, मिरगी, शारीरिक शक्ति बढ़ाने ,दर्द , दस्त, पेशाब के रोगों ,त्वचा संबंधी रोगों और बुखार आदि में प्रयोग किया जाता है।

इसके पत्तों को तोड़कर निचली सतह को गीले कपडे से पोछ कर साफ़ कर लें जिससे की बारीक रोये निकल जाये अब इस पत्ते को पीसकर रस निचोड़कर लगभग 20-25 ml रस निकाल लें । इस रस को दिन में तीन चार बार पीने से पूरे शरीर में कहीं भी ब्लीडिंग हो रही हो रुक जाती है। कई बार महिलाओं में विभिन्न समस्याओं के कारण Heavy Bleeding होती है तो विधारा का यह प्रयोग काम करता है जब बड़े बड़े डॉक्टर नाकाम हो जाएँ महंगी दवाए अपना असर न करें तो इसको जरूर आजमाएं पहली खुराक से ही आराम मिलेगा इसका कोई भी साइड इफ़ेक्ट नहीं है ।

खूनी बबासीर में भी रक्त के बहाव को उसका प्रयोग लाभकारी है।

शरीर में कहीं भी घाव हो गया हो घाव भर ही न रहा हो महंगे महंगे एंटीबायोटिक्स असफल हो जाएँ तो विधारा के पत्तों की निचली सतह के रेशों को गीले कपडे से पोछ कर साफ़ करके पत्तों को आंच में हल्का गरम करके ऊपर की चिकनी वाली सतह की तरफ से घाव पर बाँध दें, हर सात आठ घंटे पर पत्ते बदलते रहे, पहले दिन से ही लाभ मिलेगा।

लम्बी बीमारी के कारण बिस्तर पर पड़े रहने वाले मरीजो के शरीर में Bed sore हो जाते हैं, कभी कभी तो यह Bed sore रीढ़ की हड्डी तक पहुचने लगते हैं ज्यादा बढ़ जाए तो भयानक दुर्गन्ध आती है , ऐसी अवस्था में विधारा के रस को सर्जिकल कॉटन या गाज पट्टी की सहायता से बार बार लगाये जहाँ पर बाँधने की सुविधा हो तो बाँध भी सकते हैं, कैसा भी Bed sore हो जरुर ठीक होगा।

महिलाओं को सफेद प्रदर यानी ल्यूकोरिया शिकायत होने पर विधारा चूर्ण को ठंडे या सामान्य जल के साथ सेवन करने से सफेद प्रदर में लाभ होता है।

मधुमेह के मरीजों में जूते चप्पल काटने के कारण गैंग्रीन हो जाती है डॉक्टर के पास जाओ तो पहले कुछ दिन दवाई खिलाएंगे दवाओं की खुराक में कुछ हेरफेर करेंगे फिर कहेंगे आप इस ऊँगली को कटवा दे लेकिन बात यहीं नहीं रूकती किसी और ऊँगली में घाव होने के बाद धीरे से किसी दिन वो ऊँगली भी निकाल दी जाती है मरीज बेचारा असहाय हो जाता है मरता क्या न करता वाली हालत होती है कभी किसी बड़े शुगरक्लिनिक पर जाएँ आपको ऐसे मरीज दिख जायेंगे जिनकी तीन चार उंगलिया निकाल दी गयी होती है। इस गैंग्रीन की समस्या में विधारा के पत्ते बड़ा काम करते है।इन्हें गरम करके चिकनी वाली सतह की तरफ से बांधना होता है।

विधारा के पत्तों को रोये वाली सतह की तरफ से घाव पर नहीं बाँधा जाता है। यह सतह फोड़े को पकाने के लिए प्रयोग की जाती है।

विधारा के सेवन की मात्रा

रस – 5-10 मिली
काढ़ा – 15-30 मिली
चूर्ण – 2-4 ग्राम

अधिकता से बचे ,वैद्य की सलाह जरूर लें।

Medicine Plant Careya Arborea

कुम्बी के उपगोग
(Careya arborea)

आज भी जंगलो में कठोर तपस्या करने वाले साधु कुम्भी की छाल का वल्कल(वस्त्र) धारण करते है। इसकी छाल से रस्सियां भी बनाई जाती हैं।

मध्यप्रदेश के जंगलों में मिलने वाले कुम्बी को संस्कृत में कुंभी कहा जाता हैं। पर्णपाती वृक्ष का यह जंगली फल हैं । इसकी ऊँचाई 9 से 18 मीटर तक होती है। इसका अंतकाष्ठ हल्का या गहरे लाल रंग का होता है। लकड़ी भारी तथा कठोर होती है।

कुंबी की लकड़ी का उपयोग कृषि औजारों, आलमारियों, बंदूक के कुंदों, घरों के खंभों और तख्तों के बनाने के काम आता है।
कुंबी का छाल रेशेदार होती है जिसका उपयोग भूरे कागज और जहाजी रस्सों के बनाने में होता है।

औषधीय उपयोग
ग्रामीणांचल में शराब छोड़ने के लिए इसके पत्तो को पीसकर पानी पिलाया जाता है। ग्रामीणांचल में आज भी पशुओं को गिचोड़ी पड़ने पर इसका फल खिलाया जाता हैं।
इसकी छाल ठंड में शामक के रूप में दी जाती है। इसका उपयोग चेचक एवं ज्वरहारी खुजली को नष्ट करने में होता है। फूलों की पर्णयुक्त कलियों में श्लेष्मा होता है। फल सुंगधित और खाद्य होते हैं। इसमें कषाय गोंद पाए जाते हैं। फल का काढ़ा पाचक होता है, बीज विषैले होते हैं। पत्तियों में 19 प्रतिशत टैनिन पाया जाता है।

कुछ जगह इसके फलों की माला बनाकर घर मे लगा दी जाती हैं ताकि जहरीले जन्तु घर मे प्रवेश न करें।

Best Plants For Home Plantation

अपने घर में कौन सा पौधा लगाएं
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हर व्यक्ति चाहता है कि यदि उसके पास जगह है तो वह अपने घर के बगीचे में तरह तरह के पेड़ पौधे लगाये लेकिन यह भी सच है कि उनमें से कई पेड़ पौधों का घर के आस-पास होना अशुभ माना जाता है और कई ऐसे होते है जो दोष निवारक माने गए हैं। आइए जानें, कौन सा पेड़ लगाना होता है अच्छा और कौन सा है अशुभ

तुलसी :
हिन्दू धर्म में तुलसी के पौधे को एक तरह से लक्ष्मी का रूप माना गया है। कहते है की जिस घर में तुलसी की पूजा अर्चना होती है उस घर पर भगवान श्री विष्णु की सदैव कृपा दृष्टि बनी रहती है । आपके घर में यदि किसी भी तरह की निगेटिव एनर्जी मौजूद है तो यह पौधा उसे नष्ट करने की ताकत रखता है। हां, ध्यान रखें कि तुलसी का पौधा घर के दक्षिणी भाग में नहीं लगाना चाहिए, क्योंकि यह आपको फायदे के बदले काफी नुकसान पहुंचा सकता है।

बेल का वृक्ष :
भगवान शिव को बेल का वृक्ष अत्यंत प्रिय है। मान्यता है इस वृक्ष पर स्वयं भगवान शिव निवास करते हैं। भगवान शिवजी का परम प्रिय बेल का वृक्ष जिस घर में होता है वहां धन संपदा की देवी लक्ष्मी पीढ़ियों तक वास करती हैं। इसको घर में लगाने से धन संपदा की देवी लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और सारे संकट भी दूर होते है ।

शमी का पौधा :
शमी का पौधा घर में होना भी बहुत शुभ माना जाता है । शमी के पौधे के बारे में तमाम भ्रांतियां मौजूद हैं और लोग आम तौर पर इस पौधे को लगाने से डरते-बचते हैं। ज्योतिष में इसका संबंध शनि से माना जाता है और शनि की कृपा पाने के लिए इस पौधे को लगाकर इसकी पूजा-उपसना की जाती है। इसका पौधा घर के मुख्य द्वार के बाईं ओर लगाना शुभ है। शमी वृक्ष के नीचे नियमित रूप से सरसों के तेल का दीपक जलाएं, इससे शनि का प्रकोप और पीड़ा कम होगी और आपका स्वास्थ्य बेहतर बना रहेगा। विजयादशमी के दिन शमी की विशेष पूजा-आराधना करने से व्यक्ति को कभी भी धन-धान्य का अभाव नहीं होता।

अश्वगंधा :
अश्वगंधा को भी बहुत ही शुभ माना जाता है । इसे घर में लगाने से समस्त वास्तु दोष समाप्त हो जाते हैं ।अश्वगंधा का पौधा जीवन में शुभता को बढ़ाकर जीवन को और भी अधिक सक्रिय बनाता है। यह एक अत्यन्त लोकप्रिय आयुर्वेदिक औषधि है।

आंवले का पेड़ :
यदि घर में आंवले का पेड़ लगा हो और वह भी उत्तर दिशा और पूरब दिशा में तो यह अत्यंत लाभदायक है।यह आपके कष्टों का निवारण करता है। आंवले के पौधे की पूजा करने से मनौती पूरी होती हैं।
इसकी नित्य पूजा-अर्चना करने से भी समस्त पापों का शमन हो जाता है।

अशोक का पौधा :
घर में अशोक का पौधा लगाना भी बहुत शुभ माना गया है । अशोक अपने नाम के अनुसार ही शोक को दूर करने वाला और प्रसन्नता देने वाला वृक्ष है। इससे घर में रहने वालों के बीच आपसी प्रेम और सौहार्द बढ़ता है।

श्वेतार्क :
श्वेतार्क गणपति का पौधा दूधवाला होता है। वास्तु सिद्धांत के अनुसार दूध से युक्त पौधों का घर की सीमा में होना अषुभ होता है। किंतु श्वेतार्क या आर्क इसका अपवाद है। श्वेतार्क के पौधे की हल्दी, अक्षत और जल से सेवा करें। ऐसा करने से इस पौधे की बरकत से उस घर के रहने वालों को सुख शांति प्राप्त होती है। ऐसी भी मान्यता है कि जिसके घर के समीप श्वेतार्क का पौधा फलता-फूलता है वहां सदैव बरकत बनी रहती है। उस भूमि में गुप्त धन होता है या गृह स्वामी को आकस्मिक धन की प्राप्ति होती हैl

गुडहल का पौधा :
गुडहल का पौधा ज्योतिष में सूर्य और मंगल से संबंध रखता है, गुडहल का पौधा घर में कहीं भी लगा सकते हैं, परंतु ध्यान रखें कि उसको पर्याप्त धूप मिलना जरूरी है। गुडहल का फूल जल में डालकर सूर्य को अघ्र्य देना आंखों, हड्डियों की समस्या और नाम एवं यश प्राप्ति में लाभकारी होता है। मंगल ग्रह की समस्या, संपत्ति की बाधा या कानून संबंधी समस्या हो, तो हनुमान जी को नित्य प्रात: गुडहल का फूल अर्पित करना चाहिए। माँ दुर्गा को नित्य गुडहल अर्पण करने वाले के जीवन से सारे संकट दूर रहते है ।

नारियल का पेड़ :
नारियल का पेड़ भी शुभ माना गया है । कहते हैं, जिनके घर में नारियल के पेड़ लगे हों, उनके मान-सम्मान में खूब वृद्धि होती है।

नीम :
घर के वायव्य कोण में नीम केे वृक्ष का होना अति शुभ होता है। सामान्तया लोग घर में नीम का पेड़ लगाना पसंद नहीं करते, लेकिन घर में इस पेड़ का लगा होना काफी शुभ माना जाता है। पॉजिटिव एनर्जी के साथ यह पेड़ कई प्रकार से कल्याणकारी होता है। शास्त्रों के अनुसार जो व्यक्ति नीम के सात पेड़ लगाता है उसे मृत्योपरांत शिवलोक की प्राप्ति होती है। जो व्यक्ति नीम के तीन पेड़ लगाता है वह सैकड़ों वर्षों तक सूर्य लोक में सुखों का भोग करता है।

केले का पौधा :
केले का पौधा धार्मिक कारणों से भी काफी महत्वपूर्ण माना गया है। गुरुवार को इसकी पूजा की जाती है और अक्सर पूजा-पाठ के समय केले के पत्ते का ही इस्तेमाल किया जाता है। इसे भवन के ईशान कोण में लगाना चाहिए, क्योंकि यह बृहस्पति ग्रह का प्रतिनिधि वृक्ष है।इसे ईशान कोण में लगाने से घर में धन बढ़ता है। केले के समीप यदि तुलसी का पेड़ भी लगा लें तो अधिक शुभकारी रहेगा। इससे विष्णु और लक्ष्मी की कृपा साथ-साथ बनी रहती है। कहते हैं इस पेड़ की छांव तले यदि आप बैठकर पढ़ाई करते हैं तो वह जल्दी जल्दी याद भी होता चला जाता है।

बांस का पौधा :
बांस का पौधा घर में लगाना अच्छा माना जाता है। यह समृद्धि और आपकी सफलता को ऊपर ले जाने की क्षमता रखता है।सामान्यता दूध या फल देने वाले पेड़ घर पर नहीं लगाने चाहिए, लेकिन नारंगी और अनार अपवाद है । यह दोनों ही पेड़ शुभ माने गए है और यह सुख एवं समृद्धि के कारक भी माने गए है । धन, सुख समृद्धि और घर में वंश वृद्धि की कामना रखने वाले घर के आग्नेय कोण (पूरब दक्षिण) में अनार का पेड़ जरूर लगाएं। यह अति शुभ परिणाम देता है।वैसे अनार का पौधा घर के सामने लगाना सर्वोत्तम माना गया है । घर के बीचोबीच पौधा न लगाएं। अनार के फूल को शहद में डुबाकर नित्यप्रति या फिर हर सोमवार भगवान शिव को अगर अर्पित किया जाए, तो भारी से भारी कष्ट भी दूर हो जाते हैं और व्यक्ति तमाम समस्याओं से मुक्त हो जाता है।