Medicinal Use Of Ishabgul Husk

ईसबगोल कब्ज और बवासीर में गुणकारी है

आज हम आपको पुरानी कब्ज या पेट को साफ़ करने, आंतों की सूजन, कोलेस्ट्राल कम करने, मोटापा दूर करने और बवासीर में ग़ज़ब का फ़ायदा करने वाली औषधि ईसबगोल के बारे में बताएँगे। सामान्यत: औषधि रूप में ईसबगोल के बीज और उसकी भूसी का उपयोग करते हैं।इसका स्वाद तीखा और कड़वा व स्वभाव शीतल होता है।
पुरानी कब्ज, आंव, आंतों की सूजन का उपाय

पुरानी आंव या आंतों की सूजन में 100-100 ग्राम बेल का गूदा, सौंफ, ईसबगोल की भूसी और छोटी इलायची को एक साथ पीसकर पाउडर बना लेते हैं। अब इसमें 300 ग्राम देशी खांड या बूरा मिलाकर कांच की शीशी में भरकर रख देते हैं। इस चूर्ण की 2 चम्मच मात्रा सुबह नाश्ता करने के पहले ताजे पानी के साथ लेते हैं और 2 चम्मच शाम को खाना खाने के बाद गुनगुने पानी या गर्म दूध के साथ 7 दिनों तक सेवन करने से लाभ मिल जाता है। लगभग 45 दिन तक यह प्रयोग करने के बाद बंद कर देते हैं। इससे सुबह पेट साफ़, कब्ज, पुरानी आंव और आंतों की सूजन के रोग दूर हो जाते हैं।
कब्ज का सबसे आसान और कारगर उपाय

ईसबगोल भूसी के रूप में काम में आता है। यह कब्ज को दूर करती है। ईसबगोल के रेशे आंतों में पचते नहीं हैं तथा तरल पदार्थ सूखकर फूल जाते हैं और मल की निकासी शीघ्र करते हैं। तीन चम्मच ईसबगोल गर्म पानी या गर्म दूध से रात को सेवन करने से कब्ज में लाभ मिलता है।
ईसबगोल को जल में घोलकर उसका लुबाव बनाकर उसमें बादाम का तेल मिलाकर पीने से बहुत लाभ मिलता है। इससे कोष्ठबद्धता (कब्ज) दूर होकर पेट का दर्द भी नष्ट हो जाता है।
ईसबगोल 2 चम्मच, हरड़ 2 चम्मच, बेल का गूदा 3 चम्मच आदि को पीसकर चटनी बना लें। सुबह और शाम इसमें से एक-एक चम्मच गर्म दूध के साथ सेवन करने से लाभ होता है।

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ईसबगोल की भूसी को दूध के साथ रात के सोने से पहले लेने से सुबह शौच खुलकर आती है।
ईसबगोल की मात्रा 6 ग्राम, को 250 मिलीलीटर गुनगुने दूध के साथ सोने से पहले पी लें। कभी-कभी ईसबगोल की भूसी लेने से पेट फूल जाता है। ऐसा बड़ी आंतों में ईसबगोल पर बैक्टीरिया के प्रभाव से पैदा होने वाली गैस से होता है। इसलिए ध्यान रखें कि ईसबगोल की मात्रा कम से कम ही लें। ईसबगोल के प्रयोग से आंतों की कार्यशीलता बढ़ जाती है, जिससे मल ठीक से बाहर निकल आता है और कब्ज दूर हो जाती है। ईसबगोल लेने के बाद दो-तीन बार पानी पीना चाहिए। इससे ईसबगोल अच्छी तरह फूल जाता है।

त्रिफला (हरड़, बहेड़ा तथा आंवला) का दो चम्मच चूर्ण प्रतिदिन रात में सोते समय गर्म दूध या गर्म पानी के साथ लेने से कब्ज दूर हो जाती है।
गर्मी के दिनों में सुबह-शाम 3-3 चम्मच ईसबगोल की भूसी को मिश्री के मिले हुए जल में कुछ दिनों तक भिगोकर सेवन करने से कब्ज दूर हो जाता है।

लगभग 4-5 ग्राम ईसबगोल के नियमित सेवन करने से कोलेस्ट्राल नियंत्रित होता है।
मोटापा दूर करने का उपाय

ईसबगोल रेशे का अच्छा स्रोत होने के कारण मोटापे को भी कम करती है। जब यह पेट में पहुंचती है तो जल का अवशोषण (चूसते) करते हुए पेट को भर देती है। जिससे व्यक्ति को भूख नहीं लगने का अहसास होता रहता है। एक अनुसंधान के अनुसार भोजन के 3 घंटे पहले जिन महिलाओं ने ईसबगोल का सेवन किया, उनके शरीर ने आहार से वसा का अवशोषण कम किया। ईसबगोल आंतों से मल को बाहर निकाल देती है। इसके फलस्वरूप संक्रमण होने की संभावना समाप्त हो जाती है।

ईसबगोल की भूसी को गर्म पानी या गर्म दूध के साथ रात को सोते समय पीने से सभी प्रकार की बवासीर दूर होती है। ईसबगोल की भूसी को गर्म दूध में मिलाकर रात को सोते समय पीयें। इससे कब्ज ठीक होता है और बवासीर में आराम मिलता है। ईसबगोल को ठण्डे पानी में भिगोकर उसका शर्बत बनाकर छान लें। इसको पीने से खूनी बवासीर (रक्तार्श) में लाभ होता है।

Author: admin

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