Benefits Of Alkaline Water

एल्केलाइन वॉटर के फायदे

विशेषज्ञों के अनुसार कोई भी रोग हो चाहे वो कैंसर भी हो Alkaline वातावरण में नही पनप सकता।

अगर आपका शरीर Elkaline है तो कोई भी रोग जल्दी और आसानी से नही पनपता, जैसे डायबिटीज, कैंसर, हार्ट, ब्लड प्रेशर, जोड़ों का दर्द, UTI – पेशाब के रोग, Osteoporosis, सोरायसिस, यूरिक एसिड का बढ़ना, गठिया – Gout, थाइरोइड, गैस, बदहजमी, दस्त, हैजा, थकान, किडनी के रोग, पेशाब सम्बंधित रोग, पत्थरी और अन्य कई प्रकार के जटिल रोग। इन सबसे बचने के लिए सबसे सही और सस्ता उपयोग है शरीर को एल्कलाइन कर लेना।

पी एच लेवल को समझने के लिए सबसे पहले pH को समझना होगा, हमारे शरीर में अलग अलग तरह के द्रव्य पाए जाते हैं, उन सबकी pH अलग अलग होती है, हमारे शरीर की सामान्य Ph 7.35 से 7.41 तक होती है, PH पैमाने में PH 1 से 14 तक होती है, 7 PH न्यूट्रल मानी जाती है, यानी ना एसिडिक और ना ही एल्कलाइन। 7 से 1 की तरफ ये जाती है तो समझो एसिडिटी बढ़ रही है, और 7 से 14 की तरफ जाएगी तो Alkalinity क्षारीयता बढ़ रही है। अगर हम अपने शरीर के अन्दर पाए जाने वाले विभिन्न द्रव्यों की PH को Alkaline की तरफ लेकर जाते हैं। तो हम बहुत सारी बीमारियों के मूल कारण को हटा सकते हैं, और उनको हमेशा के लिए Cure कर सकते हैं।

cancer and PH – कैंसर
उदहारण के तौर पर सभी तरह के कैंसर सिर्फ Acidic Environment में ही पनपते हैं। क्यूंकि कैंसर की कोशिका में शुगर का ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में Fermentation होता है जिससे अंतिम उत्पाद के रूप में लैक्टिक एसिड बनता है और यही लैक्टिक एसिड Acidic Environment पैदा करता है जिस से वहां पर एसिडिटी बढती जाती है और कैंसर की ग्रोथ बढती जाती है। और ये हम सभी जानते हैं के कैंसर होने का मूल कारण यही है के कोशिकाओं में ऑक्सीजन बहुत कम मात्रा में और ना के बराबर पहुँचता है। और वहां पर मौजूद ग्लूकोस लैक्टिक एसिड में बदलना शुरू हो जाता है।

Gout and PH – गठिया
दूसरा उदहारण है के Gout जिसको गठिया भी कहते हैं, इसमें रक्त में यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे रक्त एसिडिक होना शुरू हो जाता है, जितना ब्लड अधिक एसिडिक होगा उतना ही यूरिक एसिड उसमे ज्यादा जमा होना शुरू हो जायेगा। अगर हम ऐसी डाइट खाएं जिससे हमारा पेशाब Alkaline हो जाए तो ये बढ़ा हुआ यूरिक एसिड Alkaline Urine में आसानी से बाहर निकल जायेगा.।

UTI and PH – पेशाब का संक्रमण
तीसरा उदहारण है के UTI जिसको Urinary tract infection कहते हैं, इसमें मुख्य रोग कारक जो बैक्टीरिया है वो E.Coli है, ये बैक्टीरिया एसिडिक वातावरण में ही ज्यादा पनपता है। इसके अलावा Candida Albicanes नामक फंगस भी एसिडिक वातावरण में ही ज्यादा पनपता है। इसीलिए UTI तभी होते हैं जब पेशाब की PH अधिक एसिडिक हो।

Kidney and PH – किडनी
चौथी एक और उदाहरण देते हैं के किडनी की समस्या मुख्यतः एसिडिक वातावरण में ही होती है, अगर किडनी का PH हम एल्कलाइन कर देंगे तो किडनी से सम्बंधित कोई भी रोग नहीं होगा। मसलन क्रिएटिनिन, यूरिक एसिड, पत्थरी इत्यादि समस्याएँ जो भी किडनी से सम्बंधित हैं वो नहीं होंगी।

आजकल हम जो भी भोजन कर रहें हैं वो 90 प्रतिशत तक एसिडिक ही है, और फिर हमारा सवाल होता है के हम सही क्यों नहीं हो रहे। या फिर कहते हैं के हमने ढेरों इलाज करवाए मगर आराम अभी तक नहीं आया। बहुत दवा खायी मगर फिर भी आराम नहीं हो रहा। तो उन सबका मुख्यः कारण यही है के उनका pH लेवल कम हो जाना अर्थात एसिडिक हो जाना।

कैसे बढ़ाएं pH लेवल
कच्ची सब्जियां – विशेषकर लौकी, पालक, चौलाई, हरी अजवायन, गाजर, अदरक, पोदीना, गोभी, पत्ता गोभी, कद्दू, मूली, शिमला मिर्च, खीरा इत्यादि हरी पत्तेदार सब्जियां। इन सब सब्जियों को कच्चा या जूस बना कर ही सेवन करना है, इनको सब्जी की तरह पकाना नहीं है। जैसा प्रकृति ने दिया है वैसा ही इस्तेमाल करना है।

फल – सेब, खुबानी, ऐवोकैडो, केले, जामुन, चेरी, खजूर, अंजीर, अंगूर, अमरुद, नींबू, आम, जैतून, नारंगी, संतरा, पपीता, आड़ू, नाशपाती, अनानास, अनार, खरबूजे, किशमिश, इमली, टमाटर इत्यादि फल।

इसके अलावा तुलसी, सेंधा नमक, अजवायन, दालचीनी, बाजरा इत्यादि।

AlkaLine Water बनाने की विधि-
रोगी हो या स्वस्थ Alkaline Water ज़रूर पिये लाभकारी होगा। इसके लिए ज़रूरी सामान – 1 निम्बू, 25 ग्राम खीरा, 5 ग्राम अदरक, 21 पोदीने की पत्तियां, 21 पत्ते तुलसी, आधा चम्मच सेंधा नमक, चुटकी भर मीठा सोडा।

अभी इन सभी चीजों को लेकर पहले छोटे छोटे टुकड़ों में काट लीजिये, निम्बू छिलके सहित काटने की कोशिश करें। एक कांच के बर्तन में इन सब चीजों को डाल दीजिये और इसमें डेढ़ गिलास पानी डाल दीजिये, पूरी रात इस पानी को ढक कर पड़ा रहने दें। और सुबह उठ कर शौच वगैरह जाने के बाद खाली पेट सब से पहले इसी को छान कर पीना है। छानने से पहले इन सभी चीजों को हाथों से अच्छे से मसल लीजिये।और फिर इसको छान कर पीजिये।

Alkaline के लिए दूसरी विधि-
1 लौकी जिसे दूधी भी कहा जाता हैं का जूस एक गिलास इसमें 5-5 पत्ते तुलसी और पोदीने के डालिए इसमें सेंधा नमक या काला नमक डाल कर पियें।

ध्यान रहे के इनको सुबह खाली पेट ही पीना है, अर्थात इनसे पहले कुछ भी खाना पीना नहीं है और इनको पीने के बाद एक घंटे तक कुछ भी खाना पीना नहीं है।

चाय कॉफ़ी चीनी ये सब ज़हर के समान है, अगर आप किसी रोग से ग्रस्त हैं तो सबसे पहले आपको इनको छोड़ना होगा, और इसके साथ ऊपर बताये गए फल सब्जियां कच्चे ही सेवन करें।

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Tips…बादाम खाने का सही तरीका

बादाम खाने का सही तरीका

अक्सर छोटे बच्चों को दिमाग तेज करने के लिए बादाम खिलाए जाते हैं। आपने भी कई बार लोगों को एक दूसरे को यह कहते सुना होगा कि याददाश्त अच्छी करनी है तो रोजाना बादाम खाया करो। बादाम में प्रोटीन, फाइबर, विटमिन ई, कैल्शियम, जिंक जैसे कई पौष्टिक तत्व मौजूद होते हैं। जो शरीर में पहुंचकर उसे अलग-अलग तरह से फायदा पहुंचाते हैं।

आयुर्वेद के मुताबिक, मीठे बादामों का सेवन करना ज्यादा फायदेमंद होता है। गर्म और मीठा बादाम शरीर के वात दोष को शांत करके ऊतकों की मरम्मत करने का काम करता है। इसका रोजाना सेवन करने से त्वचा लंबे समय तक जवां बनी रहती है।

बादाम के छिलके में टैनिन नाम का एक एंजाइम होता है। यह एंजाइम बादाम के पोषक तत्वों को शरीर में पूरी तरह अब्जॉर्ब नहीं होने देता इसलिए बादाम का सेवन हमेशा उसका छिलका उतारने के बाद ही करना चाहिए।

बादाम को पानी में भिगोकर रात भर के लिए रख दें और सुबह छीलकर खा लें। विशेषज्ञों की मानें तो बादाम को खाने का सही तरीका रात में भिगाकर सुबह खाना है। ऐसा करने से सुबह यह नर्म होने के साथ चबाने में आसान भी हो जाता है। इसके अलावा आपके शरीर को भी बादाम पचाने में आसानी होती है। विशेषज्ञों के अनुसार भारत जैसे गर्म देश में एक दिन में 4-5 से ज्यादा बादाम नहीं खाना चाहिए और अगर इसे भिगोकर खाएं तो यह ज्यादा लाभकारी होगा। नियमित रूप से बादाम का सेवन हृदय, मस्तिष्क विकार, त्वचा और बालों को स्वस्थ्य बनाने, मधुमेह, खांसी, सांस-संबंधी समस्या और एनीमिया आदि में फायदेमंद होता है।

रातभर भिगोए हुए बादाम में मोनोसेच्युरेटेड फैट मौजूद होता है जो व्यक्ति के शरीर की चर्बी को कम करने का काम करता है।

बादाम खाने से लिवर कैंसर का खतरा कम होता है क्‍योंकि इसमें विटामिन ई काफी मात्रा में होता है।

बादाम में मौजूद विटामिन ई अधिक उम्र में आंखों और दिल को होने वाले नुकसान से बचाने में भी मददगार होती है।

बादाम का सेवन करने से डायबिटीज से बचाने और कोलेस्‍ट्रोल के स्‍तर को कम करने में भी मदद मिलती है।

भीगे हुए और कच्चा बादाम खाना केवल टेस्ट की ही बात नहीं है बल्कि यह स्वास्थ्यवर्धक भी है।

छिलका सहित खाने से नुकसान….

अगर आप बादाम बिना भिगोए हुए और बिना छीले हुए खाते हैं तो उससे खून में पित्त की मात्रा बढ़ जाती है।

खाली पेट सूखे बादाम खाने से पित्त बढ़ता है और पाचन संबंधी समस्याएं हो जाती हैं।

सूखे बादाम ज्यादा खाने से व्यक्ति को कब्ज, त्वचा रोग, अत्यधिक पसीना या अन्य आंतरिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

Benefits Of Triphala

त्रिफला

कुछ प्रतिशत ही लोग ऐसे होंगे जो अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देते हो ज़्यादातर लोग तो कब्ज, पेट में जमी गंदगी से होने वाली समस्याओ से ही जूझ रहते है और ये सारी देन है बदलती लाइफ स्टाइल की । कब्ज होना और गैस बनना ये समस्याएँ आजकल बहुत ही आम हो चुकी है। प्रत्येक घर में ये समस्या आपको देखने को मिल जाएगी। कब्ज कब बवासीर का रूप लेकर शरीर में प्रकट हो जाए कुछ कह नही सकते।

आज आयुर्वेद के बारे में भले ही हम बहुत अच्छी-अच्छी बाते करके इस वातावरण में स्वस्थ रहने की कितनी भी कोशिश कर लें, पर कहीं न कहीं वो जहर वो गंदगी हमारे अन्दर जमा होती ही है। चाहे वो बाहर से आने वाली सब्जी हो या बाहर से आने आने वाला दूध, खाने वाला गेंहू हो या पीने वाला पानी या अन्य खाद्य पदार्थ ।

हमे बस ये प्रयास करते रहना है कि गंद हमारे शरीर में रुकने ना पाए। उसके लिए सप्ताह में 2 से 3 बार हमे उसकी सफाई अवश्य करनी चाहिए और आयुर्वेद में सफाई करने के बहुत से उपाय बताये गये है। कुछ उपाय किसी की देखरेख में करने पड़ते है तो कुछ स्वयं घर पर ही आसानी से किये जा सकते है।

इसके लिए “त्रिफला योग”, जिसे बनाना और इस्तेमाल करना आपको आना चाहिए। ज्यादातर लोग इसका पूर्ण लाभ नही ले पाते है क्योंकि आयुर्वेद में हर चीज को खाने का एक तरीका होता है। यानि उसके प्रोटोकॉल के हिसाब से अगर उसे खाया जायेगा तो वो पूर्ण लाभ देगी अन्यथा नही। दवा एक है मगर उसे अलग-अलग समय पर खाने से दवा अलग-अलग असर दिखाएगी। जैसे खाली पेट खाने से अलग असर, खाना खाने के तुरंत बाद खाने से अलग असर और खाने के एक घंटे बाद खाने से दवा अपना अलग-अलग असर शरीर में दिखाएगी।

त्रिफला से आज हर कोई वाकिफ है पर ज्यादातर लोग ये नही जानते कि अलग-अलग अनुपात में बना त्रिफला अलग-अलग असर शरीर में दिख़ाता है। जैसे रेडिएशन जैसी गंभीर बीमारी में 1:1:1 अनुपात वाला यानि समान मात्रा वाला त्रिफला असर करता है।

पेट की गंद को साफ़ करने के लिए 1:2:3 और 1:2:4 अनुपात वाला बना त्रिफला बहुत ही लाभदायक सिद्ध होता है।
1:2:4 अनुपात यानि हरड 100 ग्राम, बहेडा 200 ग्राम और आंवला 400 ग्राम होता है।

इसी अनुपात में इसे बनाकर सुबह खाली पेट इसका इस्तेमाल किया जाता है। इस त्रिफला को आप घर पर भी बना सकते है पर डाली जाने वाली सामग्री शुद्ध और सही होनी चाहिए।

तीन प्रेशर लाने के लिए आप त्रिफला को सुबह के समय सेवन करें। हल्का गुनगुना लगभग 2 गिलास पानी लें और त्रिफला की 1 से 2 चम्मच मुंह में फांकी मारकर होठों से गिलास को लगाकर पानी मुंह में इकट्ठा करके गर्दन इधर-उधर हिलाएं। फिर उसे पी जाएं।

त्रिफला लेने का दूसरा तरीका:- एक गिलास पानी लें उसमे 1 से 2 चम्मच त्रिफला की मिलाये और रात भर गिलास को ढककर रख दें। सुबह होने पर गिलास में पड़े पानी को छलनी की सहायता से छान ले और हल्का गुनगुना करके पी जाएं।

त्रिफला जैसे ही पेट में जाएगा अपना काम शुरू कर देगा। इसे लेते ही एक ही दिन में इसका असर आता है पर कुछ मामलों में गंदगी अधिक होने की वजह से या जिनके शरीर में वात दोष की अधिकता होती है तो उन्हें पहले ही दिन 3 प्रेशर नही आते, लेकिन अगले दिन बादलों की गडगडाहट के जैसे गंदगी को बाहर आना ही पड़ता है। पहले प्रेशर के बाद 2 प्रेशर और आते है, उन 2 प्रेशर को लाने के लिए आपको हर प्रेशर के तुरंत बाद लगभग 2 गिलास गुनगुना पानी पीना पड़ता है। पहले प्रेशर में मोटा-मोटा मल, दूसरे प्रेशर में पतला मल और तीसरे प्रेशर में पानी-पानी शरीर से बाहर निकलता है। बस सप्ताह में 2 से 3 बार इसका सेवन करो और मस्त रहो।

ध्यान रहे कि हर दिन फ्रेश होने के बाद पेट में जाने वाले पहले भोजन में 1 कटोरी मूंग की खिचड़ी में 1 चम्मच देशी गाय का शुद्ध घी मिलाकर खाएं। यह खाना अनिवार्य है क्योंकि त्रिफला खाने से पेट में जो खुश्की पैदा होती है उसे दूर करने और आँतों में चिकनाहट बनाए रखने के लिये मूंग की खिचड़ी में घी मिलाकर खाना आवश्यक है।

इसके आलावा पूरे शरीर का कायाकल्प करने के लिए त्रिफला को 40 दिन तक खाने का योग भी आयुर्वेद में बताया गया है जिससे शरीर की सप्त-धातुएं रस, रक्त, मांस, मेद, अस्थि, मज्जा और शुक्र पूर्ण रूप से शुद्ध बनती है।

ऋषि वाग्भट्ट ने तो इसी त्रिफला पर 250 सूत्र लिखे है कि त्रिफला को इसके साथ खायेंगे तो क्या होगा, त्रिफला को उसके साथ खायेंगे तो क्या होगा। हरड, बहेड़ा और आंवला मिले होने की वजह से कई जगह हमारे ऋषियों ने इसे (ब्रम्हा, विष्णु और महेश) की उपाधि भी दी है। क्योकि ये हमारे शरीर के वात-पित्त-कफ को संतुलित रखता है जिसकी वजह से इम्यून पावर हमेशा बढ़ा रहता है।

हर व्यक्ति के लिए ये जानकारी बहुत ही लाभप्रद है। इसे शेयर करके लोगो तक जरुर पहुचाये ।

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सौंफ

पतंजलि के अनुसार, सौंफ वात तथा पित्त को शांत करता है, भूख बढ़ाता है, भोजन को पचाता है, वीर्य की वृद्धि करता है। हृदय, मस्तिष्क,आखों एवं शरीर के लिए लाभकारी है। यह बुखार, गठिया आदि वात रोग, घावों, दर्द, आँखों के रोग, योनि में दर्द, अपच, कब्ज की समस्या में फायदा पहुंचाता है। इसके साथ ही यह पेट में कीड़े, प्यास, उल्टी, पेचिश, बवासीर, टीबी आदि रोगों को ठीक करने में भी सहायता करता है। इसके अलावा सौंफ का प्रयोग कई अन्य रोगों में भी किया जाता है एवं रसोई में सौंफ का उपयोग मसाले के रूप में भी किया जाता है।

सौंफ में विटामिन सी की जबर्दस्त मात्रा है और इसमें आवश्यक खनिज भी हैं जैसे कैल्शियम, सोडियम, फॉस्फोरस, आयरन और पोटेशियम।

सौंफ के घरेलू नुख्से

  1. पेट की बीमारियों के लिए यह बहुत प्रभावी दवा है जैसे मरोड़, दर्द और गैस्ट्रिक डिस्ऑर्डर के लिए।
  2. माउथ फ्रेशनर के रूप में भी आप सौंफ का उपयोग कर सकते हैं। यह सांसों की दुर्गंध से छुटकारा दिला सकती है।
  3. सौंफ का नियमित सेवन दृष्टि को तेज करता है। 5-6 ग्राम सौंफ रोज लेने से लीवर और आंखों की ज्योति ठीक रहती है।
  4. अगर भूनी हुई सौंफ को मिश्री के साथ खाया जाए, तो खांसी से राहत और आवाज की मधुरता बढ़ाई जा सकती है।
  5. अगर आप चाहते हैं कि आपका कोलेस्ट्रॉल स्तर न बढ़े तो खाने के लगभग 30 मिनट बाद एक चम्मच सौंफ खा लें। सौंफ कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रण में रखती है।
  6. सूखी, रोस्टेड और कच्ची सौंफ को बराबर मात्रा में मिला लें। इसे खाने के बाद खाएं। इससे पाचन क्रिया बेहतर रहेगी और आप हल्का महसूस करेंगे।
  7. अगर आप एक चम्मच सौंफ 2 कप पानी में उबाल लें और इस मिश्रण को दिन में दो-तीन बार लें तो आपकी आंतें अच्छा महसूस करेंगी और खांसी भी लापता हो जाएगी।
  8. सौंफ की पत्तियों में खांसी संबंधी परेशानियां जैसे दमा व ब्रोन्काइटिस को दूर रखने की भी क्षमता होती है।
  9. 15-30 मिली सौंफ काढ़ा में मिश्री तथा गाय का दूध मिलाकर पिएं। इससे हकलाना की परेशानी कम होती है।
  10. सौंफ का काढ़ा बनाकर उसमें फिटकरी मिलाकर गरारा करने से मुँह के छालों में लाभ होता है। सौंफ में बराबर मिश्री मिलाकर सेवन करने से मुँह से बदबू आने की परेशानी ठीक होती है।
  11. अपच संबंधी विकारों में सौंफ बेहद उपयोगी है। बिना तेल के तवे पर सिंकी हुई सौंफ और बिना सिंकी सौंफ को मिलाकर लेने से अपच के मामले में बहुत लाभ होता है।
  12. दो कप पानी में उबली हुई एक चम्मच सौंफ को दो या तीन बार लेने से अपच और कफ की समस्या समाप्त होती है।

13.अंजीर के साथ सौंफ का सेवन करने से सूखी खाँसी, कफ, गले की सूजन तथा लंग कैंसर में लाभ होता है। 5 मिली सौंफ के पत्तों के स्वरस का सेवन करने से अस्थमा में लाभ होता है।

  1. सौंफ के बीज के 10-20 मिली काढ़ा में मधु मिलाएं। इसे नियमित सेवन करने से मासिक धर्म विकार जैसे- समय पर मासिक धर्म का ना आना, मासिक धर्म के समय दर्द होना और बांझपन आदि में लाभ होता है।
  2. यह शिशुओं के पेट और उनके पेट के अफारे को दूर करने में बहुत उपयोगी है।
  3. सौंफ का उपयोग चाय के रूप में भी किया जा सकता है। सौंफ की चाय पीने से मोटापे को कम किया जा सकता है।

17.आप खाने के बाद भी सौंफ का सेवन पाचन शक्ति को बढ़ाने के लिए कर सकते हैं। सिर्फ पाचन ही नहीं, बल्कि इससे खून भी साफ हो सकता है।

  1. सौंफ के पत्ते के रस में रूई को भिगोकर आँखों पर रखें। इससे आँखों की जलन, दर्द तथा लालिमा की परेशानी ठीक होती है।

1-2 ग्राम सौंफ चूर्ण में 65 मि.ग्रा. खसखस यानी पोस्त के दानों का चूर्ण मिला लें। इसे नियमित सेवन करने से आँखों के रोग ठीक होते हैं तथा आँखों की रोशनी बढ़ती है।

2-4 ग्राम सौंफ चूर्ण में बराबर भाग खाँड मिलाकर सेवन करें। इससे मानसिक रोग तथा गाय के दूध के साथ सेवन करने से आँख के रोग ठीक होते हैं।

19.सौंफ में मूत्रवर्धक गुण होते है। सौंफ की चाय पीने से आपको बार-बार मूत्र आएगा जो शरीर से टॉक्सिन को निकाल बाहर करेगा।

20.सौंफ की चाय
एक चम्मच सौंफ लें। इन्हें गर्म पानी में डालें। इस बात का ध्यान रखें कि आप इन्हें ज़्यादा न उबालें क्योकि ज्यादा उबालने से इनके पोषक तत्व खत्म हो सकते हैं। अब इसे तकरीबन दस मिनट तक ढ़क कर रख दें। अब यह पानी पीले रंग की चाय में बदल जाएगा। इसे दिन में दो से तीन बार पीएं।

21.सौंफ का पानी
एक या दो चम्मच सौंफ को एक गिलास पानी में रातभर के लिए भिगो दें। सुबह उठते ही सबसे पहले इसे पी लें।

सौंफ के सेवन की मात्रा

रस – 5 मिली

काढ़ा – 15-30 मिली

चूर्ण – 2 ग्राम

सावधनियाँ-

स्तनपान करा रही महिलाओं को सौंफ का अधिक उपयोग करने से परहेज करना चाहिए, क्योंकि इससे शिशु की सेहत पर असर पड़ सकता है।
अधिक सौंफ खाने से स्किन की संवेदनशीलता बढ़ सकती है और धूप में निकलना काफी मुश्किल हो सकता है।
अगर आप किसी प्रकार की दवाइयों का सेवन करते हैं, तो आपको सौंंफ का अधिक सेवन करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
सौंफ का अधिक सेवन एलर्जी का कारण बन सकता है।

Benefits Of Garlic

लहसुन

लहसुन कम से कम 150 तरह के रोगों या लक्षणों जैसे कैंसर से लेकर डायबिटीज और दिल के रोगों, रेडिएशन के साईड इफेक्ट्स आदि के नियंत्रण में उपयोगी है।

लहसुन किसी भी सब्‍जी के स्‍वाद को जानदार बना देता है।लेकिन लहसुन में ऐसे गुणकारी तत्‍व मौजूद होते हैं जो आपको कई बीमारियों से दूर रखते हैं। लहसुन में एलिकिन नामक औषधीय तत्व पाया जाता है। एलिकिन में जीवाणुरोधी, एंटीवायरल, एंटीफंगल और एंटीऑक्सिडेंट गुण होते हैं। लहसुन विभिन्न प्रकार के विटामिन और पोषक तत्वों से भी भरपूर होता है। इसमें विटामिन B1, B6 और C के साथ-साथ मैगनीज़ कैल्शिम, तांबा, सेलेनियम और अन्य जरूरी तत्व पाए जाते हैं।

लहसुन के फायदे

लहसुन का सेवन ब्लड प्रेशर को कंट्रोल रखने में मददगार हो सकता है। इसलिए अगर हाई ब्लड प्रेशर के मरीज इसका सेवन करते हैं, तो उन्हें ब्लड प्रेशर को मैनेज करने में काफी मदद मिल सकती है। हाई ब्लड प्रेशर आज के समय की एक बड़ी समस्या बन चुका है, जिसके कारण हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी बीमारियां हो जाती सकती हैं। ऐसे में रोजाना लहसुन का सेवन करने से कई तरह के फायदे हो सकते हैं।

लहसुन के रोजाना सेवन से आप खुद को स्वस्थ रख सकते हैं। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि दुनिया में सबसे ज्यादा लोगों की मौत का कारण हार्ट अटैक, स्ट्रोक, कैंसर, हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों से होती है। लेकिन लहसुन का सेवन करने से बीमार होने का खतरा कम हो जाता है।

लहसुन में सल्फर अच्छी मात्रा में पाया जाता है। सल्फर एक ऐसा कंपाउंड है, जो आपके अंगों को धातुओं के जहरीलेपन से बचाता है, जिससे अंग डैमेज नहीं होते हैं। गलत खानपान से शरीर में कई हानिकारक तत्व पैदा हो सकते हैं, इन्हें ही टॉक्सिन्स कहा जाता है। ऐसे में लहसुन का सेवन कर आप शरीर को डिटॉक्स कर सकते हैं।

बढ़ा हुआ खराब कोलेस्ट्रॉल आपकी धमनियों में जमा होकर धमनियों को ब्लॉक कर सकता है, जिससे दिल और दिमाग तक पर्याप्त मात्रा में ब्लड नहीं पहुंच पाता है। इसी कारण से कोलेस्ट्रॉल बढ़ने पर दिल की बीमारियां जैसे हार्ट अटैक, हार्ट फेल्योर के साथ-साथ स्ट्रोक का भी खतरा बढ़ सकता है। लेकिन लहसुन के सेवन से यह खतरा कम हो जाता है।

लहसुन के कुछ उपयोगी घरेलू नुस्खे

  1. एक कप तिल के तेल में 8 लहसुन की कलियां डालकर गर्म करें और ठंडा होने पर कमर से लेकर जांघों तक इससे मालिश करें। इससे साइटिका में काफी लाभ होता है।

2.लहसुन गैस और दिल के रोगों के लिए बहुत उपयोगी माना जाता है। सूखे लहसुन की 15 कलियां 1/2 लीटर दूध और 4 लीटर पानी को एक साथ उबाल लें। इस पानी को इतनी देर उबालें कि पानी आधा रह जाए। इस पाक को जब गैस और दिल के रोग से ग्रसित रोगियों को दिया जाता है तो आराम मिल जाता है।

  1. जिन लोगों को जोड़ों का दर्द या आमवात जैसी शिकायतें हो, लहसुन की कच्ची कलियां चबाना उनके लिए अत्यंत लाभदायक होता है। बच्चों को यदि पेट में कृमि (कीड़े) होने की शिकायत हो तो लहसुन की कच्ची कलियों का 20-30 बूंद रस एक गिलास दूध में मिलाकर देने से कृमि मर कर शौच के साथ बाहर निकल आते हैं।
  2. सरसों के तेल में लहसुन की कलियों को पीसकर उबाला जाए और घावों पर लेप किया जाए तो घाव तुरंत ठीक होना शुरू हो जाते हैं।
  3. हाई ब्लड प्रेशर की शिकायत हो उन्हें रोजाना सुबह लहसुन की कच्ची कली चबाना चाहिए, नमक और लहसुन का सीधा सेवन खून साफ करता है। और सिर्फ कच्ची लहसुन और शुद्ध दूध का सेवन कैंसर जैसे रोग को भी जड़ से खत्म करता है !
  4. ब्लड में प्लेटलेट्स की कमी होने पर भी नमक और लहसुन का समान मात्रा में सेवन करना चाहिए।
  5. लहसुन के एंटीबैक्टिरियल गुणों को आधुनिक विज्ञान भी मानता है, इसका सेवन बैक्टीरिया जनित रोगों, दस्त, घावों, सर्दी-खांसी और बुखार आदि में बहुत लाभ करता है।
  6. लहसुन की 2 कच्ची कलियां सुबह खाली पेट चबाएं। इसके आधे घंटे बाद आधा चम्मच मुलेठी पाउडर का सेवन करें। यह उपाय दो महीने तक लगातार करें। मान्यता है इससे दमा रोग जड़ से खत्म हो जाता है।
  7. लौकी 50 ग्राम और लहसुन की कलियां 10 ग्राम लेकर पीस लें और इसे आधे लीटर पानी में उबालें। जब आधा पानी रह जाए तो छानकर कुल्ला करें। इससे दांत दर्द दूर होता है।
  8. कान में कीड़ा चला जाने पर डांग- गुजरात के आदिवासी सूरजमुखी के तेल में लहसुन की दो कलियां डालकर गर्म करते है और फ़िर इस तेल की कुछ बूंदें कान में डालते है, इनका मानना है कि इससे कीट बाहर निकल आता है।

Benefits Of Green Fenugreak

आयुर्वेद के अनुसार मेथी एक बहुगुणी औषधि के रूप में प्रयोग की जा सकती है। भारतीय रसोईघर की यह एक महत्वपूर्ण हरी सब्जी है। प्राचीनकाल से ही इसके स्वास्थ्यवर्धक गुणों के कारण इसे सब्जी और औषधि के रूप में प्रयोग किया जाता रहा है।

मेथी की सब्जी तीखी, कडवी और उष्ण प्रकृति की होती है.इसमें प्रोटीन केल्शियम,पोटेशियम, सोडियम, फास्फोरस, करबोहाई ड्रेट , आयरन और विटामिन सी प्रचुर मात्र में होते हैं। ये सब ही शरीर के लिए आवश्यक पौष्टिक तत्व हैं।

यह कब्ज, गैस,बदहजमी, उलटी, गठिया, बवासीर, अपच, उच्चरक्तचाप , साईटिका जैसी बीमारियों को दूर करने में सहायक है। यह ह्रदय रोगियों के लिए भी लाभकारी है.मेथी के सूखे पत्ते, जिन्हें कसूरी मेथी भी कहते हैं का प्रयोग कई व्यंजनों को सुगन्धित बनाने में होता है।

मेथी के बीज भी एक बहुमूल्य औषधि के सामान हैं। ये भूख को बढ़ाते हैं एवं संक्रामक रोगों से रक्षा करते हैं। इनको खाने से पसीना आता है, जिससे शरीर के विजातीय तत्व बाहर निकलते हैं।

इससे सांस एवं शरीर की दुर्गन्ध से भी छुटकारा मिलता है।आधुनिक शोध के अनुसार यह अल्सर में भी लाभकारी है।
मेथी से बने लड्डू एक अच्छा टॉनिक है जो प्रसूति के बाद खिलाये जाते हैं। शरीर की सारी व्याधियों को दूर कर यह शरीर में बच्चे के लिए दूध की मात्र बढाती है।

डायबिटीज में मेथी के दानों का पावडर बहुत लाभकारी होता है। इसमें अमीनो एसिड होते है जो कि इन्सुलिन निर्माण में सहायक होता है.ये थकान , कमरदर्द और बदनदर्द में लाभदायक है। इसकी पत्तियों का लेप बालों एवं चहरे के कई विकारों को दूर कर उसे कांतिमय बनाता है।

Benefits Of Parsley

अजवायन

अजवाइन रुचिकारक एवं पाचक होती है। पेट संबंधी अनेक रोगों को दूर करने में सहायक होती है, जैसे- वायु विकार, कृमि, अपच, कब्ज आदि। अजवाइन में स्वास्थ्य सौंदर्य, सुगंध तथा ऊर्जा प्रदान करने वाले तत्व होते हैं। यह बहुत ही उपयोगी होती है।

1- सरसों के तेल में अजवायन डालकर अच्छी तरह गरम करें। इससे जोड़ों की मालिश करने पर जोड़ों के दर्द में आराम होता है।
2- अजवाइन मोटापे को कम करने में मदद करती है। अतः रात्रि में एक चम्मच अजवायन एक गिलास पानी में भिगोएं। सुबह छानकर उस पानी में शहद डालकर पीने पर लाभ होता है।

3- मसूड़ों में सूजन होने पर अजवाइन के तेल की कुछ बूँदें पानी में मिलाकर कुल्ला करने से सूजन कम होती है।

4- अजवाइन, काला नमक, सौंठ तीनों को पीसकर चूर्ण बना लें। भोजन के बाद फाँकने पर अजीर्ण, अशुद्ध वायु का बनना व ऊपर चढ़ना बंद हो जाएगा।

5- आंतों में कीड़े होने पर अजवाइन के साथ काले नमक का सेवन करने पर काफी लाभ होता है।

Check up Of Fake Milk

नकली दूध की जांच

फूड लेबाेरेटरी टेस्ट अाैर दूसरी जांचाें में सीधे ताैर पर सिंथेटिक दूध पकड़ में न अाए, इसके लिए सिंथेटिक दूध की सप्लाई असली दूध के साथ मिलाकर की जाती है…

दूध काे बर्तन में तेजी से चम्मच से हिलाएं। सिंथेटिक दूध हाेगा ताे बर्तन में झाग बनेगा, जाे थाेड़ी देर बाद खत्म हाेगा। तत्काल नहीं।

सिंथेटिक दूध काे छूकर भी पहचाना जा सकता है। इस दूध में अंगुली चलाकर निकालें। अंगुली पर साबुन के पानी की जैसी चिकनाहट मिलेगी। एेसा केवल सिंथेटिक दूध में हाेता है।

सिंथेटिक दूध, असली दूध की अपेक्षा कड़वा हाेता है। इसे चखने पर शुद्ध दूध के जैसी मिठास का स्वाद नहीं मिलेगा।

Benefits Of Radish’s Leaves

मूली के पत्तों से लाभ

मूली तो हम सभी ही खाते हैं, और अब तो सर्दियों का मौसम शुरू होने वाला है, इस मौसम में बाजार में खूब मूली आती है, तो इस बार जब आप मूली घर लेकर आयें तो पत्ते फेंके नही, क्योंकि हम आपको बता दें कि मूली के पत्ते मूली से भी ज्यादा फायदेमंद होते हैं, अगर इन पतों को सुबह खाली पेट सेवन किया जाये तो बहुत से हेल्थ बेनिफिट्स मिलते हैं, आज हम आपको इसी के बारे में विस्तार से बताने वाले हैं।

1- इन पत्तों में आयरन, कैल्शियम, फोलिक एसिड, फॉस्फोरस, विटामिन सी, मिनरल्स और फाइबर जैसे कई पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं, मूली को गुणों का खजाना कहा जाये तो शायद गलत नही होगा, अगर आपको एनीमिया है जिससे थकान रहती है और हाथों पैरों में दर्द रहता है तो मूली के पत्ते खाने से बहुत लाभ होगा, क्योंकि इसमें आयरन और फोलिक एसिड मौजूद होता है, जो रक्त के निर्माण में तेजी लाते हैं।

2- यह खून को साफ करने में कारगर होता है, इनमे एंटीबैक्टीरियल और एंटीमाइक्रोबियल गुण भी होते हैं, इसलिए ये खून से सारे टॉक्सिंस को बाहर निकल देते हैं।

3- यह बवासीर की समस्या भी खत्म करते हैं, इसके लिए आप मूली के पत्तों को कच्चा खा सकते हैं, या फिर इनका जूस या सब्जी बनाकर भी खा सकते हैं, इन्हें किसी भी तरह से सेवन करने से बबवासीर की समस्या दूर हो जाती है।

4- पीलिया में भी मूली के पत्ते लाभदायक साबित होते हैं,आप चाहें तो इसका जूस भी पी सकते हैं।

5 – मूली के पत्ते लीवर के लिए किसी वरदान से कम नही होते हैं, मूली के पत्तों का सेवन करने से लीवर से सम्बन्धित बीमारियाँ नहीं होती हैं।

6 – अगर पेशाब सम्बन्धी कोई भी समस्या है तो मूली के पत्तों को हर सुबह खाली पेट खाने से ये समस्या कुछ ही दिनों में दूर हो जाती है।