Benefits Of Triphala

त्रिफला

कुछ प्रतिशत ही लोग ऐसे होंगे जो अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देते हो ज़्यादातर लोग तो कब्ज, पेट में जमी गंदगी से होने वाली समस्याओ से ही जूझ रहते है और ये सारी देन है बदलती लाइफ स्टाइल की । कब्ज होना और गैस बनना ये समस्याएँ आजकल बहुत ही आम हो चुकी है। प्रत्येक घर में ये समस्या आपको देखने को मिल जाएगी। कब्ज कब बवासीर का रूप लेकर शरीर में प्रकट हो जाए कुछ कह नही सकते।

आज आयुर्वेद के बारे में भले ही हम बहुत अच्छी-अच्छी बाते करके इस वातावरण में स्वस्थ रहने की कितनी भी कोशिश कर लें, पर कहीं न कहीं वो जहर वो गंदगी हमारे अन्दर जमा होती ही है। चाहे वो बाहर से आने वाली सब्जी हो या बाहर से आने आने वाला दूध, खाने वाला गेंहू हो या पीने वाला पानी या अन्य खाद्य पदार्थ ।

हमे बस ये प्रयास करते रहना है कि गंद हमारे शरीर में रुकने ना पाए। उसके लिए सप्ताह में 2 से 3 बार हमे उसकी सफाई अवश्य करनी चाहिए और आयुर्वेद में सफाई करने के बहुत से उपाय बताये गये है। कुछ उपाय किसी की देखरेख में करने पड़ते है तो कुछ स्वयं घर पर ही आसानी से किये जा सकते है।

इसके लिए “त्रिफला योग”, जिसे बनाना और इस्तेमाल करना आपको आना चाहिए। ज्यादातर लोग इसका पूर्ण लाभ नही ले पाते है क्योंकि आयुर्वेद में हर चीज को खाने का एक तरीका होता है। यानि उसके प्रोटोकॉल के हिसाब से अगर उसे खाया जायेगा तो वो पूर्ण लाभ देगी अन्यथा नही। दवा एक है मगर उसे अलग-अलग समय पर खाने से दवा अलग-अलग असर दिखाएगी। जैसे खाली पेट खाने से अलग असर, खाना खाने के तुरंत बाद खाने से अलग असर और खाने के एक घंटे बाद खाने से दवा अपना अलग-अलग असर शरीर में दिखाएगी।

त्रिफला से आज हर कोई वाकिफ है पर ज्यादातर लोग ये नही जानते कि अलग-अलग अनुपात में बना त्रिफला अलग-अलग असर शरीर में दिख़ाता है। जैसे रेडिएशन जैसी गंभीर बीमारी में 1:1:1 अनुपात वाला यानि समान मात्रा वाला त्रिफला असर करता है।

पेट की गंद को साफ़ करने के लिए 1:2:3 और 1:2:4 अनुपात वाला बना त्रिफला बहुत ही लाभदायक सिद्ध होता है।
1:2:4 अनुपात यानि हरड 100 ग्राम, बहेडा 200 ग्राम और आंवला 400 ग्राम होता है।

इसी अनुपात में इसे बनाकर सुबह खाली पेट इसका इस्तेमाल किया जाता है। इस त्रिफला को आप घर पर भी बना सकते है पर डाली जाने वाली सामग्री शुद्ध और सही होनी चाहिए।

तीन प्रेशर लाने के लिए आप त्रिफला को सुबह के समय सेवन करें। हल्का गुनगुना लगभग 2 गिलास पानी लें और त्रिफला की 1 से 2 चम्मच मुंह में फांकी मारकर होठों से गिलास को लगाकर पानी मुंह में इकट्ठा करके गर्दन इधर-उधर हिलाएं। फिर उसे पी जाएं।

त्रिफला लेने का दूसरा तरीका:- एक गिलास पानी लें उसमे 1 से 2 चम्मच त्रिफला की मिलाये और रात भर गिलास को ढककर रख दें। सुबह होने पर गिलास में पड़े पानी को छलनी की सहायता से छान ले और हल्का गुनगुना करके पी जाएं।

त्रिफला जैसे ही पेट में जाएगा अपना काम शुरू कर देगा। इसे लेते ही एक ही दिन में इसका असर आता है पर कुछ मामलों में गंदगी अधिक होने की वजह से या जिनके शरीर में वात दोष की अधिकता होती है तो उन्हें पहले ही दिन 3 प्रेशर नही आते, लेकिन अगले दिन बादलों की गडगडाहट के जैसे गंदगी को बाहर आना ही पड़ता है। पहले प्रेशर के बाद 2 प्रेशर और आते है, उन 2 प्रेशर को लाने के लिए आपको हर प्रेशर के तुरंत बाद लगभग 2 गिलास गुनगुना पानी पीना पड़ता है। पहले प्रेशर में मोटा-मोटा मल, दूसरे प्रेशर में पतला मल और तीसरे प्रेशर में पानी-पानी शरीर से बाहर निकलता है। बस सप्ताह में 2 से 3 बार इसका सेवन करो और मस्त रहो।

ध्यान रहे कि हर दिन फ्रेश होने के बाद पेट में जाने वाले पहले भोजन में 1 कटोरी मूंग की खिचड़ी में 1 चम्मच देशी गाय का शुद्ध घी मिलाकर खाएं। यह खाना अनिवार्य है क्योंकि त्रिफला खाने से पेट में जो खुश्की पैदा होती है उसे दूर करने और आँतों में चिकनाहट बनाए रखने के लिये मूंग की खिचड़ी में घी मिलाकर खाना आवश्यक है।

इसके आलावा पूरे शरीर का कायाकल्प करने के लिए त्रिफला को 40 दिन तक खाने का योग भी आयुर्वेद में बताया गया है जिससे शरीर की सप्त-धातुएं रस, रक्त, मांस, मेद, अस्थि, मज्जा और शुक्र पूर्ण रूप से शुद्ध बनती है।

ऋषि वाग्भट्ट ने तो इसी त्रिफला पर 250 सूत्र लिखे है कि त्रिफला को इसके साथ खायेंगे तो क्या होगा, त्रिफला को उसके साथ खायेंगे तो क्या होगा। हरड, बहेड़ा और आंवला मिले होने की वजह से कई जगह हमारे ऋषियों ने इसे (ब्रम्हा, विष्णु और महेश) की उपाधि भी दी है। क्योकि ये हमारे शरीर के वात-पित्त-कफ को संतुलित रखता है जिसकी वजह से इम्यून पावर हमेशा बढ़ा रहता है।

हर व्यक्ति के लिए ये जानकारी बहुत ही लाभप्रद है। इसे शेयर करके लोगो तक जरुर पहुचाये ।

Author: admin

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