Benefits of Rose oil

गुलाब का तेल इस तरह से बनाएं

दस गुलाब की पंखुड़ियां
थोड़ा सा जैतून का तेल
एक कप पानी

सबसे पहले ताजे गुलाबों की पंखुडि़यों को अलग कर लें। कांच के बर्तन में जैतून का तेल लेकर उसमें निकाली गई पंखुड़ियों को डाल दें। एक बर्तन में पानी को गर्म करें और उस बर्तन में तेल की शीशी को रख दें। रात भर ऐसे ही तेल की शीशी को गर्म पानी में पड़ा रहने दें। सुबह तेल से पंखुड़ियों को निकालकर निचोड़ लें। पंखुड़ियों से निकले तेल को कांच के बर्तन में रखें। अब इस तेल की चार पांच बूंदों का इस्तेमाल चेहरे पर करें।

गुलाब के तेल में ऐंटीऑक्सीडेन्ट पाया जाता हैं जो त्वचा से फ्री रैडिकल हटाते हैं। इससे रोम छिद्रों में गंदगी जमने से रोकता है और त्वचा को स्वस्थ तथा साफ रखता है।

गुलाब के तेल में सूजन को कम करने वाले और प्रतिविषाणु गुण होते हैं जो कि जलन और सूजन में लाभदायक होते हैं। यह त्वचा की सूजन कम करके उसकी सुरक्षा में मददगार होता है।

गुलाब का तेल त्वचा के पीएच स्तर को नियमित करता है इसलिए यह त्वचा के लिए प्राकृतिक रूप से नमी प्रदान करने वाला होता है।

एंटीडिप्रेसेंट गुणों के कारण यह दिमागी विकास को बेहतर बनाता है। दिमाग को शांति देकर तनाव दूर करता है। इस तेल से दी जाने वाली अरोमा थैरेपी सकारात्मक विचारों के साथ-साथ खुशी को बढ़ाने वाले हार्मोंस जैसे एंडोर्फिन, डोपामाइन व सेरेटोनिन को स्त्रावित करती है।

त्वचा पर बाहरी रूप से होने वाले किसी भी प्रकार के घावों को भरने व संक्रमण को दूर करने में गुलाब का तेल फायदेमंद है।

गुलाब का तेल हेमोस्टेटिक ड्रग का काम करता है जो अनियंत्रित रक्तस्त्राव को रोकता है। चोट या महिलाओं में माहवारी में अधिक रक्तस्त्राव की स्थिति में यह लाभकारी है।

अक्सर मुंहासे या दाद ठीक होने के बाद निशान छोड़ देते हैं। ऐसे में गुलाब के तेल के नियमित प्रयोग से इस समस्या में राहत मिलती है। महिलाओं में डिलीवरी के बाद शरीर पर आने वाले स्ट्रैच माक्र्स को भी यह दूर करता है।

इसमें मौजूद एंटीस्पास्मोडिक तत्त्व नसों व मांसपेशियों में होने वाले खिंचाव में राहत देता है। पेट की मरोड़ों में भी यह आराम दिलाता है।

नसों को पोषण देने के लिए गुलाब का तेल टॉनिक का काम करता है। इसके नियमित प्रयोग से नसों व मांसपेशियों की कोशिकाएं सक्रिय होकर मजबूत बनती हैं।

साबधानियाँ

बच्चे से लेकर बड़े इस तेल का प्रयोग कर सकते हैं। लेकिन गर्भावस्था में इसका प्रयोग न करें। इसकी दो बूंद शहद या पानी के साथ भी ले सकते है लेकिन वैद्य की सलाह लेकर।

Author: admin

A team work for healthy nature & healthy life

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *