Benefits Of Kumhada/Petha

कुष्माण्ड यानी कुम्हड़ा या पेठा एक बेल पर लगने वाला फल है, जो सब्जी की तरह खाया जाता है तथा इससे मिठाई भी बनती है, जिसे पेठा कहते हैं।
इसकी अधिकांश खेती पश्चिमी उत्तर प्रदेश में की जाती है। इसके अलावा पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान सहित पूरे भारत में कुम्हड़े की खेती होती है। तथा दक्षिण-पूर्वी एशिया में भी इसकी खेती होती है।

शीत ऋतु में कुम्हड़े के फल परिपक्व हो जाते है | पका फल मधुर, शीतल, त्रिदोषहर (विशेषत: पिक्तशामक), बुधि को तीब्र करने वाला , ह्रदय के लिए लाभकारी, बलवर्धक, शुक्रवर्धक एवं विषनाशक होता है |
इसको वैद्य जन सबसे उत्तम बताते है। यह निंद्राजनक है अतः अनेक मनोविकारों जैसे स्मृतिह्मस,अनिन्द्रा, क्रोध,विभ्रम, उद्वेग, मानसिक अवसाद,असंतुलन तथा मस्तिष्क की दुर्बलतामें लाभदायक होता है। इससे ज्ञान-धारण करने की बुद्धि की क्षमता बढती है । चंचलता, चिडचिडापन, अनिद्रा आदि दूर होकर मन शांत हो जाता है । यह त्राघात नाशक (पेशाव सम्बंधित रोग) , प्रमेह को दूर करने वाला, प्यास को शान्त करने वाला, दुर्बल अंगों को पुष्ट करने वाला, बलबर्धक एवं पित्तनाशक होता है

कच्चा पेठा पित्तनाशक होता है।मध्यम अवस्था यानी अधपका पेठा कफकारक होता है। पका हुआ पेठा मूत्राशय को शुद्ध करने वाला, सर्वदोषहर, उन्माद, मानसिक रोग में लाभकारी होता है।उन्माद में इसका रस पिलाना लाभकारी है।

कुम्हड़ा हृदयरोगियों के लिए अत्यंत लाभदायक है यह रक्तवाहिनियों एवं हृदय की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है। यह कोलेस्ट्राल कम करता है, ठंडक पहुंचाने वाला और मूत्रवर्धक होता है। यह पेट की गड़बड़ियों में भी असरदायक है। पेठा रक्त में शर्करा की मात्रा को नियंत्रित करता है और अग्न्याशय को सक्रिय करता है। इसी कारण चिकित्सक मधुमेह रोगियों को पेठा खाने की सलाह देते हैं। इसका रस भी स्वास्थ्यवर्धक माना गया है। इसमें मुख्य रूप से बीटा केरोटीन पाया जाता है, जिससे विटामिन ए मिलता है। पीले और नारंगी रंग के कद्दू में केरोटीन की मात्रा अधिक होती है। इसके बीज भी आयरन, जिंक, पोटेशियम और मैग्नीशियम के अच्छे स्रोत है।

कुम्हड़ा रक्त का प्रसादन (उतम रक्त का निर्माण) करता है । वायु व मल का निस्सारण कर कब्ज को दूर करता है । शीतल (कफप्रधान) व रक्तस्तंभक गुणों से नाक, योनी, गुदा, मूत्र आदि द्वारा होनेवाले रक्तस्राव को रोकने में मदद करता है । पित्तप्रधान रोग जैसे आतंरिक जलन, अत्यधिक प्यास, अम्लपित (एसिडिटी), बवासीर, पुराना बुखार आदि में कुम्हडे का रस, सब्जी, अवलेह उपयोगी है।

क्षयरोग (टी.बी.) में कुम्हडे के सेवन से फेफड़ो के घाव भर जाते हैं तथा खांसी के साथ रक्त निकलना बंद हो जाता है । बुखार व जलन शांत हो जाती है, बल बढ़ता है।

अंग्रेजी दवाइयों तथा रासायनिक खाद द्वारा उगायी गयी सब्जियाँ, फल और अनाज के सेवन से शरीर में विषेले पदार्थों का संचय होने लगता है, जो कैंसर के फैलाव का एक मुख्या कारण है | कुम्हडे और गाय के दूध, दही इत्यादि में ऐसे विषों को नष्ट करने की शक्ति निहित है।

पेठा में कैरोटीनॉयड और जस्ता की उच्च मात्रा पाई जाती है जो प्रोस्टेट कैंसर से रक्षा करने में मदद करती है। यह प्रोस्टेट के बढ़ने और पुरुष हार्मोन में गड़बड़ी होने को रोकता है, यह दोनों स्थिति प्रोस्टेट समस्याओं का कारण बनती है।

पेठा पोटेशियम और जिंक जैसे खनिज का एक समृद्ध स्रोत है। पोटेशियम बालों को स्वस्थ रखने और उनको बढ़ाने में मदद करता है। जिंक कोलेजन बनाए रखने में मदद करता है जो कि बालों को स्वस्थ रखने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

                      औषधि-प्रयोग

(१) मनोविकारों में कुम्हड़े के रस में १ ग्राम यष्टिमधु चूर्ण यानी मुलहठी /मुलेठी का चूर्ण मिलाकर दें ।
(२) विष-नाश के लिए इसके रस में पुराना गुड़ मिलाकर पियें ।
(३) पित्तजन्य रोगों में मिश्रीयुक्त रस लें ।
(४) पथरी हो तो इसके रस में १-१ चुटकी हींग व यवक्षार (जौ का क्षार) मिलाकर लें ।
(५) क्षयरोग में कुम्हड़ा व अडूसे का रस मिलाकर पियें ।
(६) बल-बुद्धि बढ़ने के लिए कुम्हड़ा उबालकर घी में सेंक के हलवा बनायें । इसमें कुम्हड़े के बीज डालकर खायें ।
(७) कुम्हड़े का दही में बनाया हुआ भुरता भोजन में रूचि उत्पन्न करता है ।
(८) थकन होने पर कुम्हड़े के रस में मिश्री व सेंधा नमक मिलाकर पिने से तुरंत ही ताजगी आती है ।

उपरोक्त सभी प्रयोगं में कुम्हड़े के रस की मात्र 20 से 50 मिलि. लें ।

सावधानी :-

कच्चा कुम्हड़ा त्रिदोष- प्रकोपक है । पुराना कुम्हड़ा पचने में भरी होता है, इसके मोटे रेशे आँतों में रह जाते है । अत: कच्चा व पुराना कुम्हड़ा नहीं खाना चाहिए । शीत प्रकृति के लोगों को कुम्हड़ा अधिक नहीं खाना चाहिए | कुम्हड़े की शीतलता कम करनी हो तो कुम्हड़ा की सब्जी में मेथी का छौंक लगायें और इसके रस में थोड़ा मेथी पाउडर मिला कर पिये । अगर फिर भी इसके सेवन से कोई प्रोबल्स हो तो अपने डॉ या वैद्य से सलाह जरूर लें।

आजकल कुम्हड़े का वजन व आकर बढ़ने के लिये उसमें ऑक्सिटोसिन इंजेक्शंस लगाये जाते हैं । ऐसा कुम्हड़ा फायदे की जगह नुक्सान ही करता है ।

कुम्हड़ा सीमित मात्रा में खाना सुरक्षित माना जाता है। क्योंकि इसका अधिक सेवन पुरुषों में शीघ्रपतन (ejaculation) की समस्या भी पैदा कर सकता है।

गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान अधिक मात्रा में पेठा का सेवन न करें, लेकिन हानि से बचने के लिए वैद्य की सलाह ले कर सीमित मात्रा में ही सेवन करें।

Author: admin

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