Benefits Of Green Tea

ग्रीन टी कैमेलिया साइनेन्सिस पौधे से बनाया जाता है। इस पौधे की पत्तियों का उपयोग न सिर्फ ग्रीन टी बल्कि अन्य प्रकार की चाय जैसे – ब्लैक टी बनाने में भी किया जाता है, अंतर केवल पत्तियों और कलियों से चाय बनाने की प्रक्रिया में होता है। ग्रीन टी का उत्पादन करने के लिए ताजे पत्तों को तोड़ने के बाद तुरंत भाप दी जाती है,
ताकि ग्रीन टी का अच्छे से निर्माण हो। अन्य चाय की तुलना में ग्रीन टी के लिए पौधे की पत्तियों को पूर्ण रूप से सुखाया नहीं जाता जिससे उनका पूर्ण ऑक्सीकरण भी नहीं होता है एवं स्वास्थ्य को बढ़ावा देने वाले प्राकृतिक पॉलीफेनोल्स भी संरक्षित रहते हैं।पोषक तत्वों की दृष्टि से ग्रीन टी और ब्लैक टी में लगभग समान ही हैं, लेकिन ग्रीन टी में ब्लैक टी की तुलना में पॉलीफेनोल्स की मात्रा अधिक होती है। यही पॉलीफेनोल्स जो एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, स्वास्थ्य के लिए काफी लाभकारी हो सकते हैं।

बिना चीनी के ग्रीन-टी में बिल्कुल कैलोरी नहीं होती है। ग्रीन-टी में फ्लेवेनॉल और कैटेकिन मौजूद होता है, जो एक तरह का पॉलीफेनोल (पोषक तत्व) होता है, इसके कई फायदे हैं।
इनके अलावा, ग्रीन-टी में सबसे शक्तिशाली यौगिक ईजीसीजी (EGCG) मौजूद है, जिसे एपीगैलोकैटेकिन-3-गैलेट (epigallocatechin-3-gallate) के नाम से भी जाना जाता है। इसके कई लाभ है और उनमें से एक है शरीर में मेटाबॉलिक दर का बढ़ना और वजन नियंत्रित रहना।
अन्य महत्वपूर्ण यौगिक जो ग्रीन-टी में शामिल हैं, वो कुछ इस प्रकार हैं – एमिनो एसिड व एंजाइम,कार्बोहाइड्रेट
मैग्नीशियम, कैल्शियम, मैंगनीज, लौह, क्रोमियम, तांबा व जिंक जैसे खनिजों की मात्रा,विटामिन-बी 6, विटामिन-सी,प्रोटीन,थियनाइन,एमिनो एसिड आदि।

ग्रीन टी मुख्य रूप से शरीर के लिए काफी लाभकारी है। यह शरीर के मेटाबोलिज्म को बढ़ाती है और वजन नियंत्रण करने में मदद करती है। रोजाना 2 से 3 कप ग्रीन टी पीने से शरीर स्वस्थ रहता है और पाचन क्रिया मजबूत रहती है।

ग्रीन टी बनाने की कोई ख़ास विधि नही जिस प्रकार से चाय बनाते है उसी प्रकार से ग्रीन टी बनाते है बस फर्क इतना होता है कि चाय में दुध और चीनी डालते है और इसमें दुध और चीनी नही डालते है। अगर आपको ग्रीन टी कड़वी लगती है तो आप उसमें जरा सा शहद मिलाकर पी सकते हैं।

एक कप ग्रीन टी बनाने के लिए 2 से 4 ग्राम ग्रीन टी की जरूरर होती है । पानी को पूरी तरह उबलने के बाद 2-3 मिनट के लिए छोड़ देते हैं। प्याले में रखी ग्रीन टी पर गर्म पानी डालकर फिर 1से 2 मिनट छोड़ दें। हल्का गर्म रहने पर औषिधि की तरह सेवन करें । एक दिन में 300 से 400 मिलीग्राम ग्रीन टी पर्याप्त होती है।

ग्रीन टी पीने का उचित तरीका –

ग्रीन टी में एंटीऑक्सीडेंट और पोलिफेोल्स भरपूर मात्रा में होते हैं। लेकिन फिर भी वह चाय का ही एक प्रकार है, जिसमें कैफिन होता है। इसलिए ग्रीन टी को भी दिन में 2 या 3 कप से ज्यादा नहीं लेने चाहिए। इससे ज्यादा लेने पर यह आपको डीहाइड्रेट कर सकती है। जरूरत से ज्यादा लेने पर यह आपके शरीर की कार्यप्रणाली को भी प्रभावित कर सकता है।

सुबह उठते ही या नाश्ते के साथ न पिएं और न ही कभी खाली पेट पिएं।

नाश्ता या भोजन के तुरंत बाद ग्रीन टी पीना लाभकारी नहीं , कम से कम 45 मिनट तक ग्रीन टी न पियें ।

ग्रीन टी देर रात को नहीं पीना चाहिए क्योंकि इसमें उपस्थिति कैफीन की मात्रा नींद कम कर सकती है।

कुछ लोग ग्रीन टी में दूध और चीनी मिलाकर पीते हैं. ग्रीन टी में चीनी और दूध मिलाने से परहेज करें।
ग्रीन टी में शहद मिलाकर पी सकते है।

एक दिन में दो या तीन कप ये ज्यादा ग्रीन टी पीना हानिकारक हो सकता है।

मुंह के लिए लाभदायक

यह बात बहुत कम लोग ही जानते हैं कि ग्रीन टी का सेवन ओरल हेल्थ के लिए बेहद लाभकारी है। इसका सेवन करने से पेरियोडोंटल, बैक्टीरियल प्लॉक आदि को नियंत्रित होता है। जिससे दांतों या मसूड़ों की बीमारी नहीं होती। साथ ही इसमें मौजूद फ्लोराइड दांतों को खराब होने से बचाता है।

वजन करे कम

ग्रीन टी का सेवन करने से शरीर का मेटाबॉलिज्म बूस्टअप होता है, जिससे वजन कम करने में सहायता मिलती है। इसके अतिरिक्त इसमें कुछ ऐसे तत्व पाए जाते हैं, जो फैट बर्निंग प्रोसेस को तेज करते हैं और वजन जल्द कम होने लगता है।

मधुमेह रोगियों के लिए वरदान

ग्रीन टी में पॉलीफेनॉल्स भरपूर मात्रा में होता है।पॉलीफेनॉल्स असल में एंटी-ऑक्सीडेंट व एंटी फ्लेमेटरी होते हैं, जो डायबिटीज के मरीजों में दिल के रोगों के खतरे को कम करने में मददगार है। अर्थात ग्रीन टी को अगर डायबिटीक लोगों के लिए वरदान कहा जाए तो गलत नहीं होगा। ग्रीन टी में एंटीआक्सीडेंट्स भरपूर होने के कारण टाइप 1 डाइबिटीज के रोगियों के लिए काफी फायदेमंद है। इसमें मौजूद पॉलीफेनोल्स शरीर में शर्करा के स्तर को नियंत्रित करते हैं। जिससे डायबिटीज का खतरा भी कम होता है। साथ ही इसमें पाए जाने वाले एंटी−डायबिटीक तत्व मधुमेह रोगियों को कई मायनों में लाभ पहुंचाते हैं।

मजबूत करे इम्युन सिस्टम

ग्रीन टी शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर व्यक्ति को बीमारियों से लड़ने के लिए सक्षम बनाता है। ऐसा इसमें मौजूद कैटेकिन के कारण होता है। चूंकि ग्रीन टी व्यक्ति के इम्युन सिस्टम को मजबूत बनाती है, जिसके कारण ऑटोइम्युन रोगों के होने की संभावना कई गुना कम हो जाती है।

बेहतर होगा पाचन तंत्र

शरीर की पूरी कार्यप्रणाली कहीं न कहीं पाचन तंत्र से जुड़ी है। अगर इसमें समस्या होती है तो व्यक्ति कई तरह के रोगों से घिर जाता है। लेकिन ग्रीन टी में पाए जाने वाले एंटी−ऑक्सीडेंट, विटामिन बी, सी और ई पाचन तंत्र को सही तरह से कार्य करने के लिए प्रेरित करते हैं।

बचाए कैंसर से

बहुत से अध्ययन से यह बात साबित हुई है कि ग्रीन टी में कुछ ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो कई तरह के कैंसर से व्यक्ति की रक्षा करते हैं। इसके अतिरिक्त यह कैंसर से लड़ने में भी काफी सहायक है।

ग्रीन टी के अन्य फायदे

ग्रीन टी में जीरो कैलोरी होती है, जो वजन कम करने में भी मदगार होती है। जब आप वजन कम करते हैं तो इंसुलिन की सेंसिविटी बढ़ती है जो ब्लड शुगर लेवल को कम करने का काम करती है। ग्रीन टी में मौजूद कैटेशिन इंसुलिन के प्रभाव को कम करता है। यह कार्बस के प्रभाव को कम कर सकता है. ग्रीन टी एंटीबैक्टीरियल गुणों से भरपूर होती है और यह कोलेस्ट्रोल एवं ब्लड प्रेशर को कम करने में मददगार है. इसमें कैफीन की मात्रा कम होती है। जो लोग अपने कैफीन सेवन पर ध्यान देते हैं उनके लिए यह सर्वश्रेष्ठ विकल्प है।

ग्रीन टी में उपस्थित एंटीऑक्सीडेंट शरीर का मेटाबोलिज्म बढ़ाकर वज़न कम करते है। इसके सेवन करने से शरीर में जमा फैट को कम करने में सहायता मिलती है। ख़ासकर मोटापे के शिकार हुए लोगो में ग्रीन टी से लाभ देखा गया है।

ग्रीन टी का सेवन करने से ब्लड प्रेशर तो नियंत्रित रहता ही है और साथ ही हार्ट की बिमारियों का ख़तरा भी कम देखा गया है। ग्रीन टी हार्ट की ब्लॉक हुई धमनियों को खोल कर हार्ट अटैक का ख़तरा भी कम करती है।

ग्रीन टी में कुछ मात्रा में कैफीन भी होती है जो तंत्रिका तंत्र में न्यूरो ट्रांसमिटर्स के काम पर असर डालती है।

ग्रीन टी में L- थिऑनीन (एक अमीनो एसिड) भी होता है जो ब्रेन को सक्रिय रखता है। ग्रीन टी का सेवन करने से तंत्रिका तंत्र हेल्थी रहता है और याददाश्त तेज़ बनती है।

ग्रीन टी में उपस्थित पॉली फिनॉल और कैफीन एंटी डिप्रेस्सेंट का काम करते है। ग्रीन टी मानसिक तनाव कम करने का अच्छा माध्यम भी है।

ग्रीन टी के सेवन करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मज़बूत बनती है। इसमें उपस्थित कैटेकिन (catechins) और ईजीसीजी नामक तत्व इम्यूननिटी बढ़ाने के लिए उत्तरदायी है।

ग्रीन टी में पाए जाने वाले पॉली फेनोल्स में एंटी इंफ्लेमेटरी गुण होते है जो IL-1β को कंट्रोल रखते है। इससे आर्थराइटिस (हड्डियों के बीमारी) में में फ़ायदा मिलता है।

अल्जाइमर और पार्किंसन रोग सबसे अधिक पाये जाने वाले तंत्रिका तंत्र के रोग है। ग्रीन टी में पाया जाने वाला कैटेचिन वृद्धावस्था में अल्जाइमर और पार्किंसन रोग से बचाव करता है।

शरीर में अनेक जैविक क्रियाओं के फलस्वरूप फ़्री रेडिकल उत्पन्न होते है जो कोशिकाओं , DNAऔर RNA को नुक़सान पहुंचाते है। ग्रीन टी में पाए जाने वाले एंटी ऑक्सीडेंट इन फ्री रेडिकल को ख़त्म करके कोशिकाओं की मरम्मत करते है और लम्बी उम्र प्रदान करते है।

ग्रीन टी में पाए जाने वाले कैटेकिन पायरीआ के बैक्टीरिया को नष्ट करते है और पायरीआ से होने वाले नुक़सान की भरपाई करते है। पायरीआ के कारण जबड़े की हड्डी घुलती रहती है और दांत हिलने लगते है, ग्रीन टी में मिलने वाला हड्डी घोलने वाली कोशकाओं को बनने से रोककर हड्डी का घुलना कम करता है। ग्रीन टी का सेवन करने से मसूड़ों की सूजन, ख़ून निकलना एवं दुर्गन्ध में भी फ़ायदा होता है।

ग्रीन टी से दांत मज़बूत बनते है। ग्रीन टी में मिलने वाली फ्लोराइड दांतो की सतह कठोर बनती है जिससे दांतो में कीड़ा आसानी से नहीं लगता।

नोट: इसके उपयोग की अधिकता से बचे।

Author: admin

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