Benefits Of Ginger

अदरक

आयुर्वेद में अदरक को महत्वपूर्ण बूटियों में से एक माना गया है। आयुर्वेदिक चिकित्सक इसको एक शक्तिशाली पाचक के रूप में लेने की सलाह देते हैं।अदरक की तासीर गर्म होती है।
यह पाचक अग्नि को भड़काता है जिससे भूख बढ़ती है।इसमें प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम, कार्बोहाइड्रेटस एवं विटामिन्स के साथ-साथ मैग्नीज और कॉपर आदि पोषक तत्व पाए जाते हैं। जो शरीर के द्रव्य का बहाव सुचारू रूप से बनाए रखने में मददगार होते है ।अदरक पुरे शरीर में रक्त प्रवाह बढ़ा देता है एवं शरीर को सुचारु रूप से चलाने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है जिससे पोषक तत्व शरीर के सभी हिस्सों तक आसानी से पहुंच जाते हैं। अदरक का प्रयोग परिवारों में आम है और स्वास्थ्य के लिए अनमोल है।

अदरक के सेवन से ह्रदय की मांसपेशियां ज्यादा शक्ति से संकुचित होती है , रक्त वाहिनियाँ फ़ैल जाती है, जिससे उतकों और कोशिकाओं का रक्त प्रवाह बढ़ जाता है और मांसपेशियों का अकड़न, दर्द, तनाव आदि से आराम मिलता है । अदरक का प्रचलन बतौर औषधि प्राचीन कल से होता आ रहा है । अदरक को महाऔषधि भी कहा जाता है ।

ताजी अदरक में 81% जल, 2.5% प्रोटीन, 1% वसा, 2.5% रेसे और 13% कार्बोहायड्रेट होता है | इसके अतिरिक्त इसमें आयरन, कैल्सियम लौह फास्फेट आयोडीन क्लोरिन खनिज लवण तथा विटामिन भी प्रयाप्त मात्र में होता है जिसके अदरक के सेवन से अपच, गैस दूर करने, पेट दर्द, सुजन दूर करने, पेट में कीड़े, पेशाब की मात्र बढाने, हाजमा ठीक करने तथा खांसी आदि के लिए व्यापक रूप से किया जाता है ।

सूखी अदरक को सोंठ कहा जाता है । इसमें 9 से 10 प्रतिशत 15% प्रोटीन, 3 से 6 प्रतिशत वसा, 3 से 8 प्रतिशत रेशे, 60 से 70 प्रतिशत शर्करा तथा उड़नशील तेल 1 से 3 प्रतिशत होते है ।

अदरक को पाचन तंत्र, ह्रदय रोग, संक्रमण,माइग्रेन, जोड़ों का दर्द,कैंसर इत्यादि विभिन्न प्रकार के रोगों में लाभकारी पाया है।

अदरक के प्रभाव से रक्त प्लेटलेट कोशिकाओं का चिपचिपापन कम हो जाता है जिससे रक्त में थक्का बनने की सम्भावना कम हो जाती है फलस्वरूप अनेक रोगों जैसे ह्रदय आघात, स्ट्रोक ( पक्षघात ) इत्यादि से बचाव हो जाता है ।कोलेस्ट्रोल युक्त भोजन के बाद भी अदरक के सेवन से कोलेस्ट्रोल स्तर कम बढ़ता है ।

शोधों से पता चला है की अदरक शरीर में कुछ खास किस्म के जैव रसायन ( बायो-केमिकल ) के निर्माण में सहायक करता है । जो न सिर्फ कुदरती तौर पर घाव के ठीक होने में मदद करता है बल्कि शरीर में इम्यून सिस्टम को भी बल प्रदान करता है । करीब एक ग्राम अदरक सेवन करने से यात्रा के दौरान सम्बेदनशील व्यक्तियों में होने वाली मितली और उलटी से आराम मिलता है । इसके सेवन से महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान होने वाली मितली व उलटी से आराम मिलता है और इसके सेवन से कोई दुष्प्रभाव भी नहीं होता है।

जोड़ो, हड्डियों के रोगों के कारण सुजन, दर्द, हाथ पैर चलाने में कठिनाई, पेट के कीड़े और खांसी आदि समस्या में अदरक सेवन करने से सुजन एवं अन्य लक्ष्ण उत्पन्न करने वाले रसायन हारमोन जैसे प्रोसटाग्लेनडीन, ल्यूकोट्रिन का उत्पादन कम हो जाता है । अदरक एक शक्तिशाली जीवाणुनाशक भी है । अदरक बड़ी आँत में पाए जाने वाली बैक्टीरिया का बढ़ना रोक देता है जिसके कारण गैस से राहत मिलती है । इसमें विद्यमान गुण के कारण कैंसर से भी बचा जा सकता है । इसमें एंटी-ओक्सिडेंट गुण भी होते है , इसके सेवन से कैंसर बचाव में सहायक एंजायम सक्रीय हो जाते है । अदरक में 400 से भी ज्यादा ऐसे कम्पाउंड ( यौगिक ) है जो अलग-अलग ढंग से अपना अच्छा प्रभाव शरीर पर डालता है।

भारतीय व्यंजन में अदरक का उपयोग बहुतायत से होता है।इसका सेवन सब्जी, चटनी, अचार, सॉस, टॉफी, पेय पदार्थों, बिस्कुट, ब्रेड इत्यादि में स्वाद व सुगंध के लिए किया जाता है।इसका प्रयोग से भोजन स्वादिष्ट और सुपाच्य हो जाता है साथ ही स्वास्थ्यवर्धक भी ।

जी मिचलना और उल्टी की समस्या को रोकने के लिए अदरक औषधि की तरह का काम करता है। 1 चम्मच अदरक के जूस में 1 चम्मच नींबू का रस मिलाएं। इसको हर दो घंटे बाद पीएं। जल्द ही राहत मिलेगी।

अदरक में एंटी-इन्फ्लॉमेट्री प्रॉपर्टीज होती है जो जोड़ों के दर्द को खत्म करने में सहायक है। अदरक को खाने से या इसका लेप लगाने से भी दर्द खत्म होता है। इसका लेप बनाने के लिए अदरक को अच्छे से पीस लें। उसमें हल्दी मिला लें। इस पेस्ट को दिन में दो बार लगाएं। कुछ ही दिनों में फर्क दिखाई देने लगेगा।

अदरक को स्तन कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर और कोलोन कैंसर के इलाज में भी बहुत ही लाभदायक है।कई और तरह के कैंसर, जैसे गुदा कैंसर, लिवर कैंसर, फेफड़ों के कैंसर, मेलानोमा और पैंक्रियाज के कैंसर आदि के रोकथाम में भी यह मददगार है एक कैंसर रोधी दवा बीटा-एलिमेन अदरक से बनाई जाती है।

कुछ महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान बहुत दर्द होती है। ऐसे में अदरक की चाय काफी फायदा पहुंचाती है। इसलिए दिन में 2 बार अदरक की चाय पीएं। इससे दर्द कम होगा।

सर्दियों के मौसम में सर्दी-जुकाम और फ्लू जैसी छोटी-मोटी समस्या होना आम है। इससे बचने के लिए नियमित रूप से अदरक का सेवन करें। यह शरीर को गर्म रखता है जिससे पसीना अधिक आता है और शरीर गर्म बना रहता है।

जिन लोगों को माइग्रेन की समस्या है उनके लिए अदरक रामबाण इलाज है। जब भी माइग्रेन का अटैक आए, तब अदरक की चाय बना कर पीएं। इसको पीने से माइग्रेन में होने वाले दर्द और उल्टी से काफी हद तक राहत मिलेगी।

अदरक कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करने, ब्लड प्रेशर को ठीक रखने, खून को जमने से रोकने का काम करता है। इससे दिल संबंधित बीमारियां भी नहीं होती है। इसलिए अपनी डाइट चार्ट में अदरक को शामिल करें।

अदरक पेट फूलने, कब्ज, गैस, एसीडिटी जैसी समस्याओं को ठीक रखने में भी सहायक है। जिन लोगों को पेट से संबंधित समस्याएं रहती है वह रोजान सुबह खाली पेट अदरक का सेवन करें।

भोजन से पहले नमक छिड़क कर अदरक के टुकड़े खाने से लार बढ़ता है, जो पाचन में मदद करता है और पेट की समस्याओं से बचाव करता है। भारी भोजन के बाद अदरक की चाय पीने से भी पेट फूलने और उदर वायु को कम करने में मदद मिलती है। अगर आपको पेट की समस्याएं ज्यादा परेशान कर रही हैं, तो आप फूड प्वायजनिंग के लक्षणों को दूर करने के लिए भी अदरक का सेवन कर सकते हैं।

मोर्निंग सिकनेस की समस्या अधिकतर गर्भवती महिलाओं को होती है। रोजाना सुबह अदरक के 1 टुकड़े को चबा कर खाएं। कुछ दिनों तक अदरक खाने से मोर्निंग सिकनेस की समस्या दूर हो जाएगी।

सर्दियों में अदरक खाने से शरीर गर्म तो रहता ही है साथ ही उसे एनर्जी भी मिलती है। रोजाना सुबह अदरक वाली चाय पीने से शरीर में चुस्ती- फुर्ती बनी रहेगी।

अदरक का उपयोग

ज्यादातर लोग सब्जी में अदरक डालकर तड़का लगाते हैं। इसके अलावा और भी कई तरीके हैं, जिनके जरिए आप अदरक का सेवन कर सकते हैं।

अदरक का अचार बनाकर आप इसे अपने आहार में शामिल कर सकते हैं। यह आपको स्वादिष्ट भी लगेगा और आपको अदरक के फायदे भी पता चलेंगे।

इसके अलावा, अदरक की चाय भी काफी प्रसिद्ध है। आप अदरक वाली चाय बनाकर पी सकते हैं।

वहीं, अदरक के पाउडर का भी सेवन किया जा सकता है।
इसके अलावा, अदरक को लंबा और पतला काट कर इस पर नमक-मिर्च और अपनी पसंद का मसाला लगाकर धूप में सुखा लें। फिर इसे आप कभी भी खा सकते हैं। आपका पाचन अच्छा रहेगा।

अदरक-नीबू की चाय

चाय नींबू की चाय आपको ताजगी और स्फूर्ति से भर देगी। साथ ही इसमें कैफीन के दुष्प्रभाव नहीं होते। एक पतीले में साढ़े चार कप पानी उबालें। पानी के उबलने पर 2 इंच अदरक के टुकड़े को 20-25 तुलसी पत्तों के साथ कूट लें एव थोड़ी सी सूखी धनिया के बीजों के साथ उबलते पानी में डालें । 3 से 5 मिनट तक उबलने दें। चाय को कप में छान लें और स्वादानुसार एक चम्मच नीबू का रस एवं गुड़ मिलाएं इस प्रकार आपकी चार कप चाय तैयार हो जायेगी।

सावधानियां

इसमें कोई दो राय नहीं है कि अदरक काफी गुणकारी होता है, लेकिन जरूरत से ज्यादा सेवन करने पर अदरक के नुकसान भी हो सकते हैं।

दो साल से कम उम्र के बच्चों को अदरक नहीं दी जानी चाहिए।

आम तौर पर, वयस्कों को एक दिन में 4 ग्राम से ज्यादा अदरक नहीं लेनी चाहिए। इसमें खाना पकाने में इस्तेमाल किया जाने वाला अदरक शामिल है।

आप अदरक की चाय बनाने के लिए सूखे या ताजे अदरक का इस्तेमाल कर सकते हैं और उसे रोजाना दो से तीन बार पी सकते हैं।

अदरक खून पतला करने वाली दवाओं सहित बाकी दवाओं के साथ परस्पर प्रभाव कर सकती है।

किसी विशेष समस्या के लिए अदरक की खुराक की जानकारी और संभावित दुष्प्रभावों के लिए हमेशा डॉक्टर से संपर्क करें।

गर्भवती स्त्रियों को 1 ग्राम रोजाना से अधिक नहीं लेना चाहिए। गर्भावस्था के समय ज्यादा अदरक भ्रूण पर प्रभाव डाल सकता है। चिकित्सकीय सलाह आवश्यक है ।

यदि मधुमेह रोगी दवाई लेते हुए अदरक का भी सेवन करते हैं तो उनका ब्लड लेवल बडी ही खतरनाक तरीके से कम हो जाने का खतरा बढता है। इसलिये अदरक को हमेशा सीमित रख कर ही खाना चाहिये।डायबिटीज के मरीज अदरक का सेवन करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

अदरक के अधिक सेवन से कुछ महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान अतिरिक्त रक्तस्राव होने की समस्या हो सकती है। इसलिये चिकित्सकीय सलाह आवश्यक है।

अदरक का ज्यादा मात्रा में सेवन करने से आपके ह्रदय को हानि पहुंच सकती है। इसलिए, इसका सेवन अधिक मात्रा में नहीं करना चाहिए।

अदरक आपकी त्वचा के लिए काफी फायदेमंद है, लेकिन कुछ लोगों को इससे एलर्जी हो सकती है। ऐसे में उन्हें अदरक को स्किन पर लगाने से जलन हो सकती है। कोई भी समस्या होने पर चिकत्सीय परामर्श जरूर लें।

Author: admin

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