Benefits Of Flax (Alsi) Seeds

हर रसोई में अलसी का होना बहुत जरूरी है क्योंकि अलसी में कई ऐसे पोषक तत्व होते हैं, जो मानव शरीर के लिए स्वास्थ्यवर्धक हैं। अलसी में ओमेगा-3 फैटी एसिड, विटामिन बी 1, प्रोटीन, फाइबर, मैग्नीशियम, मैंगनीज, फॉसफोरस, सेलेनियम, आयरन आदि भरपूर मात्रा में होते है। औषधीय गुणों के साथ साथ यह पोषकता के मामलों में भी एक पौष्टिक भोजन है।

एक चम्मच अलसी में निम्नलिखित पोषक तत्व होते हैं:

55 कैलोरी
3 ग्राम फाइबर
2 ग्राम प्रोटीन
3 ग्राम कार्बोहायड्रेट
40 मिलीग्राम मैग्नीशियम
0.3 मिलीग्राम मैंगनीज
65 मिलीग्राम फॉस्फोरस
0.1 मिलीग्राम कॉपर
0.2 मिलीग्राम थिआमिन/विटामिन बी 1
3 मिलीग्राम सेलेनियम
इसके अलावा अलसी में पर्याप्त मात्रा में विटामिन बी6, आयरन, पोटैशियम और जिंक भी मौजूद होते हैं। इन तथ्यों से आप अंदाजा लगा सकते हैं, कि अलसी स्वास्थ्य के लिए कितना फायदेमंद है?

प्रतिदिन प्रतिव्यक्ति 30 – 60 ग्राम से अधिक अलसी का सेवन नहीं करना चाहिये। 30 ग्राम आदर्श मात्रा है।अलसी को धीमी आँच पर हल्का भुने (अलसी को सूखी कढ़ाई में डालिये रोस्ट करते समय चट चट की आवाज करती है) फिर ग्राइंडर में पीस कर रोज सुबह-शाम एक-एक चम्मच पावडर पानी के साथ लें अथवा आटे में मिलाकर रोटी, पराँठा आदि बनाकर खाना सकते है।
भोजन के बाद सौंफ की तरह खाने के लिए मिक्सी से इन्हें थोड़े दरदरे पीसिये, एकदम बारीक मत कीजिये,

अलसी में उपस्थित ओमेगा-3,घुलनशील फाइबर्स, प्राकृतिक रूप से आपके शरीर में कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने का काम करता है। इससे हृदय की धमनियों में जमा कोलेस्ट्रॉल घटने लगता है, और रक्त प्रवाह बेहतर होता है, नतीजतन हार्ट अटैक की संभावना नहीं के बराबर होती है।

अलसी पाचन तंत्र को सही रखने में बहुत सहायक है क्यूंकि अलसी के बीज फाइबर निहित होते हैं, जो स्वास्थ्य पाचन तंत्र के लिए बहुत आवश्यक हैं।

अलसी में वसा फाइबर बहुत अधिक मात्र में पाया जाता हैं, जिससे हमे भूख कम लगती हैं और हमारा वजन तेजी से घटता हैं हर उम्र में जवान रहने के लिए वजन कम रहना जरुरी हैं इसलिए हमे नियमित रूप से अलसी का सेवन करना चाहिए।

अलसी के बीज का नयमित रूप से सेवन करने से ख़राब कोलेस्ट्रोल को कम करने में बहुत मदद मिलती हैं। अलसी में घुलनसील फाइबर पाया जाता हैं जो कोलेस्ट्रोल को नियंत्रित रखता हैं।

अलसी की पुल्टिस का प्रयोग गले एवं छाती के दर्द, सूजन तथा निमोनिया और पसलियों के दर्द में लगाकर किया जाता है। इसके साथ यह चोट, मोच, गठिया, संधिवात, सूजन, जोड़ों की सूजन, शरीर में कहीं गांठ या फोड़ा उठने पर लगाने से शीघ्र लाभ पहुंचाती है।

अलसी के तेल का धुआं सूंघने से नाक में जमा कफ निकल आता है और पुराने जुकाम में लाभ होता है। यह धुआं हिस्टीरिया रोग में भी गुण दर्शाता है। अलसी के काढ़े से एनिमा देकर मलाशय की शुद्धि की जाती है। उदर रोगों में इसका तेल पिलाया जाता हैं।

अलसी के तेल और चूने के पानी का मिश्रण आग से जलने के घाव पर लगाने से घाव बिगड़ता नहीं और जल्दी भरता है।

स्नायु रोगों, कमर एवं घुटनों के दर्द : स्नायु रोगों, कमर एवं घुटनों के दर्द में यह तेल पंद्रह मि.ली. मात्रा में सुबह-शाम पीने से काफी लाभ मिलेगा। इसी कार्य के लिए इसके बीजों का ताजा चूर्ण भी दस-दस ग्राम की मात्रा में दूध के साथ प्रयोग में लिया जा सकता है।

अलसी के बीजों का मिक्सी में बनाया गया दरदरा चूर्ण पंद्रह ग्राम, मुलेठी पांच ग्राम, मिश्री बीस ग्राम, आधे नींबू के रस को उबलते हुए तीन सौ ग्राम पानी में डालकर बर्तन को ढक दें। तीन घंटे बाद छानकर पीएं। इससे गले व श्वास नली का कफ पिघल कर जल्दी बाहर निकल जाएगा। मूत्र भी खुलकर आने लगेगा।

डायबिटीज के रोगी को कम शर्करा व ज्यादा फाइबर खाने की सलाह दी जाती है। अलसी व गैहूं के मिश्रित आटे में जहां अलसी और गैहूं बराबर मात्रा में हो।

अलसी विशेषकर महिलाओं के लिए भी काफी अच्छा माना जाता है। अलसी हार्मोनल डिस्बैलेंस को बेहतर करता है। अलसी में लिगनन पाए जाते हैं, जिससे महिलाओं में मोनोपॉज की समस्या कम होती है। कई बार डॉक्टर हार्मोन अनियमितता में दवाई की जगह अलसी का सेवन करनें की सलाह भी देते हैं।

महिलाओं के शरीर में मौजूद एस्ट्रोजन हार्मोन को संतुलित करनें के लिए भी अलसी का सेवन किया जाता है।

अलसी महिलाओं के पीरियड सम्बन्धी समस्याओं का निदान करता है, और सही समय पर पीरियड लानें में मदद करता है। इसके बेहतर परिणाम के लिए महिलाएं रोजाना सुबह नाश्ते में दो चम्मच अलसी के बीज का सेवन करें।

अलसी को सेक्स सम्बन्धी समस्याओं के लिए बहुत फायदेमंद है। अलसी के बीज और अलसी का तेल दोनों ही इस समस्या में आपकी मदद कर सकते हैं। पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन नामक हार्मोन की मात्रा बढ़ाता है। टेस्टोस्टेरोन को पुरुषों का मुख्य सेक्स हार्मोन कहा जाता है, और यह सेक्स सम्बंधित ज्यादातर मामलों में मुख्य भूमिका निभाता है।

इसके अलावा यदि आपमें स्पर्म या शुक्राणु की कमी या
बांझपन, पुरूषहीनता, शीघ्र स्खलन व स्तम्भन आदि दोषों में बहुत लाभदायक है। अर्थात स्त्री-पुरुष की समस्त लैंगिक समस्याओं का एक-सूत्रीय समाधान है।

खाली पेट अलसी खाने से पेट साफ़ होता है और पाचन क्रिया मजबूत होती है।

साबधानियाँ……

दिन भर में 2 टेबलस्पून (40 ग्राम) से ज्यादा अलसी का सेवन न करें।
साबुत अलसी लंबे समय तक खराब नहीं होती लेकिन इसका पाउडर हवा में मौजूद ऑक्सीजन के प्रभाव में खराब हो जाता है, इसलिए ज़रूरत के मुताबिक अलसी को ताज़ा पीसकर ही इस्तेमाल करें। इसे अधिक मात्रा में पीसकर न रखें। बहुत ज्यादा सेंकने या फ्राई करने से अलसी के औषधीय गुण नष्ट हो सकते हैं और इसका स्वाद बिगड़ सकता है।

अलसी खाने से कुछ लोगों को शुरुआत में कब्ज हो सकती है। ऐसा होने पर पानी ज्यादा पिएं। अलसी खून को पतला करती है इसलिए यदि आपको ब्लड प्रेशर की समस्या हो तो इसके सेवन से पहले डॉक्टर से परामर्श कर लें।

बच्चों को अलसी का सेवन न कराएं।

गर्भवती महिलाएं या स्तनपान कराने वाली माताएं अलसी से परहेज करें।

जिनको मासिक धर्म के दौरान ज्यादा ब्लीडिंग की परेशानी होती है या जिन महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर या ओवेरियन कैंसर रह चुका हो या जो महिलाएं गर्भनिरोधक गोलियां ले रही हों इन सभी को अलसी का सेवन नही करना चाहिए।

रक्त को पतला करने वाली दवाई का सेवन कर रहे लोगों को इसका सेवन अपने डॉक्टर से परामर्श लेकर ही करना चाहिए क्योंकि यह रक्तस्राव के खतरे को बढ़ा सकता है।

प्रोस्टेट कैंसर, उच्च ट्राइग्लिसराइड्स, हाइपोथायरायडिज्म और हार्मोन के प्रति संवेदनशील स्थितियों से पीड़ित लोगों को भी अलसी के बीज का सेवन सावधानी के साथ करना चाहिए या नही करना चाहिए।

मधुमेह दवा के साथ-साथ अलसी के बीज का प्रयोग करते समय ब्लड शुगर के स्तर की जांच करते रहें।

अलसी के बीज में उच्च मात्रा में फाइबर पाया जाता है, स्वस्थ रहने के लिए अलसी का सेवन करते समय पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए अन्यथा यह आंत और पैरों पर दुष्प्रभाव डाल सकते हैं।

अलसी के बीज का अधिक मात्रा में सेवन ना करें क्योंकि यह आंतो में रुकावट पैदा कर सकता है।

अलसी का अधिक मात्रा में सेवन एलर्जिक रिऐक्शन का कारण भी बन सकता है।

अलसी में ज्यादा मात्रा में फाइबर होता है, अलसी के अधिक सेवन करने से शरीर में कुछ समस्याएं हो सकती हैं जैसे– पेट में गैस ,दस्त,भूख ना लगना,हार्मोन में अनियमितता,एलर्जी आदि।

गम्भीर रोगों से ग्रस्त लोग अपने डॉ या वैद्य से परामर्श जरूर लें।

Author: admin

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