Benefits Of Elephant Creeper

विधारा (Elephant Creeper)

विधारा साधारण लता नही एक औषधीय लता है

विधारा को Elephant Creeper, अधोगुडा, घाव बेल, समुद्र सोख,आदि नाम से भी जाना जाता है। विधारा का एक अन्य प्रचलित नाम घावपत्ता भी है। यह पूरे भारत में बहुत आसानी से उपलब्ध है, इसको घरों में बड़े गमलों में लगाया जा सकता है यह वैसे भी निर्जन पड़े स्थानों में आसानी उग आता है । औषधीय प्रयोग के लिए उन्ही पौधों के पत्तो का इस्तेमाल करें जो पौधे धूप में लगे हैं।

विधारा स्वाद में कड़वा, तीखा, कसैला तथा गर्म प्रकृति की एक सदाबहार लता है। आयुर्वेद में इसका प्रयोग रसायन यानी सातों धातुओं को पुष्ट करने वाले पदार्थ के रूप में किया जाता है। इसका प्रयोग कफ, वात शान्त करता है,पुरुषों में शुक्राणुओं को बढ़ाता है, हड्डियां मजबूत होती हैं,विधारा का जोड़ों का दर्द, गठिया, बवासीर, सूजन, डायबिटीज, खाँसी, पेट के कीड़े, घाव भरने , ब्लीडिंग रोकने, एनीमिया, मिरगी, शारीरिक शक्ति बढ़ाने ,दर्द , दस्त, पेशाब के रोगों ,त्वचा संबंधी रोगों और बुखार आदि में प्रयोग किया जाता है।

इसके पत्तों को तोड़कर निचली सतह को गीले कपडे से पोछ कर साफ़ कर लें जिससे की बारीक रोये निकल जाये अब इस पत्ते को पीसकर रस निचोड़कर लगभग 20-25 ml रस निकाल लें । इस रस को दिन में तीन चार बार पीने से पूरे शरीर में कहीं भी ब्लीडिंग हो रही हो रुक जाती है। कई बार महिलाओं में विभिन्न समस्याओं के कारण Heavy Bleeding होती है तो विधारा का यह प्रयोग काम करता है जब बड़े बड़े डॉक्टर नाकाम हो जाएँ महंगी दवाए अपना असर न करें तो इसको जरूर आजमाएं पहली खुराक से ही आराम मिलेगा इसका कोई भी साइड इफ़ेक्ट नहीं है ।

खूनी बबासीर में भी रक्त के बहाव को उसका प्रयोग लाभकारी है।

शरीर में कहीं भी घाव हो गया हो घाव भर ही न रहा हो महंगे महंगे एंटीबायोटिक्स असफल हो जाएँ तो विधारा के पत्तों की निचली सतह के रेशों को गीले कपडे से पोछ कर साफ़ करके पत्तों को आंच में हल्का गरम करके ऊपर की चिकनी वाली सतह की तरफ से घाव पर बाँध दें, हर सात आठ घंटे पर पत्ते बदलते रहे, पहले दिन से ही लाभ मिलेगा।

लम्बी बीमारी के कारण बिस्तर पर पड़े रहने वाले मरीजो के शरीर में Bed sore हो जाते हैं, कभी कभी तो यह Bed sore रीढ़ की हड्डी तक पहुचने लगते हैं ज्यादा बढ़ जाए तो भयानक दुर्गन्ध आती है , ऐसी अवस्था में विधारा के रस को सर्जिकल कॉटन या गाज पट्टी की सहायता से बार बार लगाये जहाँ पर बाँधने की सुविधा हो तो बाँध भी सकते हैं, कैसा भी Bed sore हो जरुर ठीक होगा।

महिलाओं को सफेद प्रदर यानी ल्यूकोरिया शिकायत होने पर विधारा चूर्ण को ठंडे या सामान्य जल के साथ सेवन करने से सफेद प्रदर में लाभ होता है।

मधुमेह के मरीजों में जूते चप्पल काटने के कारण गैंग्रीन हो जाती है डॉक्टर के पास जाओ तो पहले कुछ दिन दवाई खिलाएंगे दवाओं की खुराक में कुछ हेरफेर करेंगे फिर कहेंगे आप इस ऊँगली को कटवा दे लेकिन बात यहीं नहीं रूकती किसी और ऊँगली में घाव होने के बाद धीरे से किसी दिन वो ऊँगली भी निकाल दी जाती है मरीज बेचारा असहाय हो जाता है मरता क्या न करता वाली हालत होती है कभी किसी बड़े शुगरक्लिनिक पर जाएँ आपको ऐसे मरीज दिख जायेंगे जिनकी तीन चार उंगलिया निकाल दी गयी होती है। इस गैंग्रीन की समस्या में विधारा के पत्ते बड़ा काम करते है।इन्हें गरम करके चिकनी वाली सतह की तरफ से बांधना होता है।

विधारा के पत्तों को रोये वाली सतह की तरफ से घाव पर नहीं बाँधा जाता है। यह सतह फोड़े को पकाने के लिए प्रयोग की जाती है।

विधारा के सेवन की मात्रा

रस – 5-10 मिली
काढ़ा – 15-30 मिली
चूर्ण – 2-4 ग्राम

अधिकता से बचे ,वैद्य की सलाह जरूर लें।

Author: admin

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