Benefis Of Chaulai/ Amarnath

चौलाई प्रोटीन, खनिज, विटामिन से भरपूर, कैंसर में भी लाभदायक

सब्जियों में चौलाई का अपना एक अलग स्थान है। दुनिया भर के लोग इसका उपयोग सब्जी और अनाज के रूप में स्वास्थ्य लाभों के रूप में करते है। यह अनेकों औषधीय गुणों से भरपूर होता है। चौलाई दो तरह की होती है, एक सामान्य हरे पत्तों वाली दूसरी लाल पत्तों वाली।चौलाई का पौधा अक्सर घरों व खेतों में आसानी से उग जाता है। कई बार इसे बेकार समझकर लोग उखाड़ देते हैं। ऐसे भी कई लोग हैं जो इसे खाना पसंद नहीं करते। जबकि सच तो यह है कि आयुर्वेद में चौलाई को अमृत के समान औषधि माना जाता है।

रामदाना या राजगिरा अमरांथ या चौलाई का बीज होता है। ये चौलाई हरी नहीं बल्कि लाल होती है। लाल चौलाई को लाल साग या लाल भाजी भी कहा जाता है। लाल चौलाई में आयरन और कैल्शियम भरपूर मात्रा में पाया जाती है। रामदाना उपवास के समय बहुत ही पौष्टिक फलाहार होता है। राजगिरा शाकाहारी लोगों के लिये प्रोटीन का सबसे अच्छा स्रोत बन सकता है। प्राचीन युग में किसान या गरीब इसको खाकर शरीर में पौष्टिकता की कमी और ऊर्जा को पूरा करते थे। इसलिए वे राजगिरा को भगवान का दान मानते थे और इसी संदर्भ में इसका नाम रामदाना रख दिया गया।

यह कफ और पित्त का नाश करती है जिससे रक्त विकार दूर होते हैं। पेट और कब्ज के लिए चौलाई का साग बहुत उत्तम माना जाता है।

अनेक प्रकार के विष जैसे चूहे, बिच्छू, संखिया, आदि का विष चढ गया हो तो चौलाई का रस या जड़ के क्वाथ में काली मिर्च डालकर पीने से विष दूर हो जाता है। चौलाई का नित्य सेवन करने से अनेक विकार दूर होते हैं।

लगभग 15 प्रतिशत चौलाई में प्रोटीन होता है जो आपके वजन घटाने के कार्यक्रम में सहायता कर सकता हैं।

चौलाई की सब्जी का सेवन करने से वात, रक्त व त्वचा विकार दूर होते हैं। सबसे बडा गुण सभी प्रकार के विषों का निवारण करना है, इसलिए इसे विषदन नाम दिया गया है।

इसके डंठल और पत्तों में पौष्टिक तत्वों की प्रचुर मात्रा पाई जाती है। पेट और कब्ज के लिए चौलाई बहुत उत्तम मानी जाती है।

चौलाई में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, कैल्शियम और विटामिन-ए, मिनिरल्स और आयरन प्रचुर मात्रा में पाए जाते है। इसमें सोना धातु पाया जाता है जो किसी और साग-सब्जियों में नहीं पाया जाता।

औषधि के रूप में चौलाई के पंचांग यानि पांचों अंग- जड, डंठल, पत्ते, फल, फूल काम में लाए जाते हैं। इसकी डंडियों, पत्तियों में प्रोटीन, खनिज, विटामिन ए, सी प्रचुर मात्रा में है।

चौलाई की सब्जी बनाने का तरीका

चौलाई की सब्जी कम तेल में बनाएं। इसके पत्तों को दालों में मिलाकर,आलू के साथ मिलाकर आलू भुजिया आदि एवं बैंगन के साथ मिलाकर भी बना सकते हैं।

चौलाई के स्वास्थ्य लाभ

  1. चर्म रोग : किसी भी तरह के चर्म रोग में इसके पत्ते पीस कर लेप कर 21 दिनों तक लगातार लेप करने से वह ठीक हो जाता है।
  2. शरीर से बहता रक्त रोके : शरीर में अगर कही भी खून बह रहा है और बंद नहीं हो रहा लाल पत्ते वाली चौलाई की जड़ को पानी में पीस कर पी लेने से ही रुक जाता है। एक बार पीने से नहीं रुक रहा तो बारह घंटे बाद दुबारा पीने को कहा गया है।
  3. सूजन को कम करें : ऐमरैन्थ यानि चौलाई के तेल और पेप्टाइड में एंटी-इफ्लेमेंटरी गुण होता है जो दर्द और सूजन को सहजता से कम करने में मदद करता है। यह पुरानी स्थितियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है जहां पर सूजन स्वास्थ्य को प्रभावित करता है।
  4. फोड़े-फुंसी : फोड़े-फुंसी पर चौलाई के पत्तों की पुल्टिस बना कर लगाने से फोड़ा जल्द पक कर फूट जाता है। सूजन होने पर उस स्थान पर इसका लेप करने से सूजन दूर होती है।
  5. मोटापा : जैसा की हम जानते हैं कि प्रोटीन रक्त में इंसुलिन के स्तर को कम कर और हार्मोंन की विज्ञप्ति कर आपकी भूख को दबा देता है जिससे की आप भूख को कम महसूस करते हो।
  6. रक्तचाप कम करें : अध्ययन के अनुसार, ऐमरैन्थ में मौजूद फाइबर और फिटोन्यूट्रीएंट्स नामक तत्व रक्तचाप को कम करने में मदद करते है। जिससे यह कोलेस्ट्रॉल, सूजन और रक्तचाप के साथ प्रभावी ढ़ंग से लड़ता है और दिल की सेहत के लिए भी अच्छा होता है।
  7. शरीर में रक्त की कमी दूर करें : औषधि के रूप में चौलाई की जड़, पत्ते और बीज सभी काम में लाये जाते है। इसकी पत्तियों और बीजों में प्रोटीन, विटामिन ए और सी प्रचुर मात्रा में होता है।

ऐमरैन्थ यानि चौलाई का साग एनिमिया रोग से लड़ने का सबसे कारगर उपाय है। इसके सेवन से शरीर में रक्त की कमी दूर होती है। शरीर में खून की कमी को दूर करने के लिए इसका सेवन सब्जी या सूप के रूप में करें।

नोट-कृपया इसके उयोग की अधिकता से बचें औषिधि के रूप में ही इसका सेवन करे।

Author: admin

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