47-गिलोय के औषधीय उपयोग

गिलोय
गिलोय एक बहुवर्षीय लता होती है जिसके पत्ते देखने में पान के पत्ते की तरह होते हैं. गिलोय इतनी गुणकारी होती है की इसका नाम अमृता भी रखा गया है. गिलोय वात पित्त एवं कफ का संतुलन शरीर में सही करती है जिसके परिणाम स्वरूप अनेकों रोग स्वयं ठीक हो जाते हैं. आयुर्वेदमें गिलोय को ज्वर की महानतम आयुषधि भी माना गया है.

डेंगू एवं चिकनगुनिया में गिलोय रस को अत्यंत लाभकारी पाया गया है. इसके सेवन से शरीर में रक्त की कमी नहीं रहती एवं शरीर उर्जावान रहता है. शायद ही ऐसा कोई रोग आयुर्वेद में वर्णित हो जिसमें गिलोय लाभ ना करती हो. स्वस्थ मनुष्य को भी गिलोय का सेवन अवश्य करना चाहिए ताकि शरीर रोगों से स्वयं को मुक्त रख पाने में सक्षम बन सके.

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