04-औषधीय पौधा पीपल

वैज्ञानिक वर्गीकरण
जगत:
पादप
विभाग:
सपुष्पक
वर्ग:
मैग्नोलियोप्सीडा
गण:
रोज़ेलेस
कुल:
मोरेसी
वंश:
फाइकस
जाति:
F. religiosa

संस्कृत भाषा में पिप्पलः, अश्वत्थः आदि दो दर्जन से अधिक नाम हैं । हिन्दी – पीपल, पीपली । गुजराती – पीप्पलो, पीपुलजरी । बंगाली – अश्वत्थ, असुद, असवट । पंजाबी – भोर, पीपल । तामील – अचुक्तम्, अटास, अरशमरस, अस्वत्तम्, कुजीरावनम् इत्यादि । तेलगू – अश्वथ्यम्, बोधि, रावीचेट्ट आदि । फारसी – दरख्त-तेरजो, अंग्रेजी – Pipal tree लेटिन – Ecus Religiuse.

पीपल को देववृक्ष भी कहा जाता है। भारतीय संस्कृति में पीपल का वृक्ष काटना या कटवाना मना है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी पीपल सभी वृक्षों में अपने गुणों की वजह से सर्वश्रेष्ठ है। यह 24 पहर दूषित गैस कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर प्राणवायु ऑक्सीजन का उत्सर्जन करता है। इसकी छाया शीतल होती है। पीपल के स्पर्श या इसके नीचे बैठने मात्र से जीव तनावमुक्त होकर, मन चेतन और प्रसन्न हो जाता है।

पीपल का धार्मिक महत्‍व के साथ साथ आयुर्वेद में इसका खास महत्‍व है। कई बीमारियों का उपचार इस पेड़ से हो जाता है। गोनोरिया, डायरिया, पेचिश, नसों का दर्द, नसों में सूजन के साथ झुर्रियों की समस्‍या से निजात पाने के लिए इस पेड़ का प्रयोग कीजिए। एंटीऑक्‍सीडेंट युक्‍त यह पेड़ हमारे लिए बहुत फायदेमंद है।पीलिया, रतौंधी, मलेरिया, खाँसी और दमा तथा सर्दी और सिर दर्द में पीपल की टहनी, लकड़ी, पत्तियों, कोपलों और सीकों का प्रयोग का उल्लेख मिलता है।

पीपल की जड़ों में एंटीऑक्सीडेंट सबसे ज्यादा पाए जाते हैं। इसके इसी गुण के कारण यह वृद्धावस्था की तरफ ले जाने वाले कारकों को दूर भगाता है। इसके ताजी जड़ों के सिरों को काटकर पानी में भिगोकर पीस लीजिए, इसका पेस्‍ट चेहरे पर लगाने से झुर्रियां से झुटकारा मिलता है।

पीपल की 10 ग्राम छाल, कत्था और 2 ग्राम काली मिर्च को बारीक पीसकर पाउडर बना लीजिए, नियमित रूप से इसका मंजन करने से दांतों का हिलना, दांतों में सड़न, बदबू आदि की समस्‍या नहीं होती है और यह मसूड़ों की सड़न को भी रोकता है।

पीपल की छाल के अन्दर का भाग निकालकर इसे सुखा लीजिए, और इसे महीन पीसकर इसका चूर्ण बना लें, इस चूर्ण को दमा रोगी को देने से दमा में आराम मिलता है।

पीपल के 4-5 कोमल, नरम पत्ते खूब चबा-चबाकर खाने से, इसकी छाल का काढ़ा बनाकर आधा कप मात्रा में पीने से दाद, खाज, खुजली जैसे चर्म रोगों में आराम होता है।

पैरों की फटी पड़ी एड़ियों पर पीपल के पत्‍ते से दूध निकालकर लगाने से कुछ ही दिनों फटी एड़ियां सामान्य हो जाती हैं और तालु नरम पड़ जाते हैं।

पीपल के कोमल पत्तों को छाया में सुखाकर उसे अच्‍छे से पीस लीजिए, इसे आधा लीटर पानी में एक चम्मच चूर्ण डालकर काढ़ा बना लें। काढ़े में पीसी हुई मिश्री मिलाकर कुनकुना करके पीने से नजला-जुकाम से राहत मिलती है।

इसे पित्‍त नाशक माना जाता है, यानी यह पेट की समस्‍या जैसे – गैस और कब्‍ज से राहत दिलाता है। पित्‍त बढ़ने के कारण पेट में गैस और कब्‍ज होने लगता है। ऐसे में इसके ताजे पत्‍तों के रस एक चम्‍मच सुबह-शाम लेने से पित्‍त का नाश होता है।

पीपल के पत्तों में से जो दूध निकलता है उसको आंख में लगाने से नेत्र वेदना में आराम मिलता है।

पीपल और वट वृक्ष की छाल दिनों को समान मात्रा में मिला कर जल में पका कर कुल्ला करने से दांतों के रोगों में लाभ मिलता है।

पीपल की ताजी टहनी से रोज दातुन करने से दांत मजबूत होते है और मसूड़ों की सूजन खत्म हो जाती है। एवं मुँह से आने वाली दुर्गन्ध भी खत्म हो जाती है।

पीपल के आधा चम्मच पके फलों का चूर्ण शहद के साथ मिला कर खाने से हकलाहट में लाभ मिलता है।

पीपल के 3-4 नए पत्तों को मिश्री के साथ 250 मिली पानी मे बारीक पीसकर घोलकर छान लें। यह शर्बत पीलिया के रोगी को दिन में 2 बार पिलाये। इसका प्रयोग 3-5 दिन करें। पीलिया के लिए रामबाण औषधि है।

Author: admin

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