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प्रिय सदस्यों हमें अपने जीवन काल में फलदार, छायादार एवं औषधीय पौधों का यथाशक्ति वितरण,रोपण एवं संरक्षण अवश्य करना चाहिए ताकि हमारा पर्यावरण प्रदूषण मुक्त रहे ताकि हम सब और हमारी पीढ़ियां स्वस्थ्य रहें,रोग मुक्त रहें। हमें पूर्ण विश्वास है कि आप यह पुनीत कार्य सहर्ष करेंगें और ऐसा करने में आप स्वयं को प्रफुल्लित एवं गौरवान्वित महसूस करेंगे और अन्य लोगो को भी इस पुनीत कार्य हेतु आप प्रेरित करेंगें।

मत्स्य पुराण में भी वृक्षों का महत्व स्वीकार करते हुए कहा गया है :-

दश कूप समा वापी, दशवापी समोहद्रः।
दशहृद समः पुत्रो, दशपुत्रो समो द्रुमः।

अर्थात दस कुँए के बराबर एक बावड़ी, दस बावड़ी के बराबर एक सरोवर, दस सरोवर के समान एक पुत्र और दस पुत्रों के समान एक वृक्ष का महत्त्व होता है।

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